मामला इंदौर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी पार्थन पिल्लई का है। वर्ष 2023 में मप्र हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए शासन को आदेश दिया कि उन्हें अन्य कर्मचारियों की तरह वेतनमान दिया जाए। इस आदेश का पालन नहीं होने पर अवमानना याचिका दायर की गई थी।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ का है मामला।
ज्यादातर कर्मचारियों को मिल गया वेतनमान का लाभ।
4 माह के अंदर शासन ने नहीं किया आदेश का पालन।
इंदौर। मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने अवमानना याचिका की सुनवाई करते हुए अपर मुख्य सचिव मोहम्मद सुलेमान सहित प्रदेश सरकार के पांच अधिकारियों के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है। मामला एक कर्मचारी के वेतनमान से जुड़ा है।
हाई कोर्ट ने दिया था शासन को आदेश
मप्र हाई कोर्ट ने शासन को अप्रैल 2024 में आदेश दिया था कि कर्मचारी को वेतनमान का लाभ दिया जाए।
इसके बावजूद कर्मचारी को लाभ नहीं मिला तो उसने अवमानना याचिका दायर कर दी।
इसमें भी शासन की तरफ से कोई उपस्थित नहीं हुआ। इस पर कोर्ट ने अधिकारियों के खिलाफ जमानती वारंट जारी कर दिया।
जानकारी के अनुसार अब अधिकारियों को 9 सितंबर को कोर्ट में उपस्थित होकर जमानत करानी होगी।
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की सरकार ने संविदाकर्मियों के लिए एक नीति बनाई थी।
इसमें संविदाकर्मियों को शत प्रतिशत वेतनमान देने का निर्णय लिया गया था।
ज्यादातर कर्मचारियों को इस नीति में शामिल कर लिया गया और उन्हें वेतनमान का लाभ मिल भी गया, लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते कुछ कर्मचारी छूट गए थे।
स्वास्थ्य विभाग इंदौर के कर्मचारी पार्थन पिल्लई भी इन्हीं छूटे कर्मचारियों में से हैं। उन्हें वेतनमान (पे स्केल) नहीं मिला। इस पर उन्होंने हाई कोर्ट की शरण ली और याचिका दायर कर दी।
नवंबर 2023 में हाई कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए शासन को आदेश दिया कि उन्हें अन्य कर्मचारियों की तरह वेतनमान दिया जाए।
शासन को चार माह के भीतर कोर्ट के आदेश का पालन करना था, लेकिन जब ऐसा नहीं हुआ तो पार्थन पिल्लई ने अवमानना याचिका दायर कर दी।
इन्हें बनाया गया था पक्षकार
अवमानना याचिका में तत्कालीन प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मोहम्मद सुलेमान, प्रमुख सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग मनीष रस्तोगी, स्वास्थ्य आयुक्त विवेक पोरवाल, स्वास्थ्य संचालक दिनेश श्रीवास्तव और क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं इंदौर डाॅ. आरसी पनिका को पक्षकार बनाया।
शासन की तरफ से कोई उपस्थित नहीं हुआ
याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करने वाले एडवोकेट यशपाल राठौर ने बताया कि अवमानना याचिका में नोटिस होने के बावजूद शासन की तरफ से कोई उपस्थित नहीं हुआ। इस पर कोर्ट ने पांचों अधिकारियों के जमानती वारंट जारी कर दिए। कोर्ट ने अधिकारियों से 9 सितंबर को उपस्थित होने को कहा है।
