लापरवाही का पर्याय बन गए इंदौर के युग पुरुष धाम आश्रम की एक और बच्ची की जान जाने से यहां मरने वाले बच्चों की संख्या अब 11 हो गई है। बच्ची का अस्पताल में उपचार चल रहा था, हालांकि अधिकारी इससे अनजान हैं। पहले भी संस्था ने प्रशासन को बच्चों की मौत के मामले में भ्रमित किया है।
अब शहर के युगपुरुष धाम आश्रम की मानसिक दिव्यांग बच्ची की मौत।
चार दिन से चाचा नेहरू चिकित्सालय में चल रहा था बच्ची का उपचार।
बच्ची की मौत का कारण पीएम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल पाएगा।
इंदौर। 10 बच्चों की मौत के बाद चर्चा में आए पंचकुइया स्थित अनाथ आश्रम युगपुरुष धाम बौद्धिक विकास केंद्र में 15 दिन पहले आई बच्ची की सोमवार को इलाज के दौरान मौत हो गई। ताज्जुब की बात तो यह है कि जिस महिला व बाल विकास के अफसरों को आश्रम की निगरानी करनी थी, उन्हें इस बच्ची के बारे में जानकारी तक नहीं है। उल्लेखनीय है कि युगपुरुष धाम आश्रम में 29 जून से 2 जुलाई के बीच 10 बच्चों की मौत और 90 बच्चे बीमार हो गए थे। इसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए आश्रम की पदाधिकारियों को हटा दिया था।
जन्म से ही दिव्यांग थी बच्ची
युगपुरुष धाम आश्रम में करीब 15 दिन पहले दादा गौरी शंकर अपनी पोती सिया को छोड़कर गए थे। सिया जन्म से ही दिव्यांग थी। करीब चार दिन पहले अचानक उसकी तबीयत खराब हुई और उसे चाचा नेहरू अस्पताल में भर्ती किया गया। सोमवार शाम को इलाज के दौरान अचानक सिया की तबीयत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई। हालांकि अब तक मौत के कारण स्पष्ट नहीं हुए हैं। बताया जा रहा है कि सिया घर में सबसे छोटी थी। उसके पिता मनोज मजदूरी करते हैं। पुलिस के मुताबिक मंगलवार को सिया की मौत का कारण पीएम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल पाएगा।
चार दिन से चल रहा इलाज था, अफसरों को पता नहीं
इसी युगपुरुष आश्रम में महीने भर पहले लापरवाही के चलते 10 मानसिक दिव्यांग बच्चों की मौत हो गई थी।
संस्था द्वारा कई दिनों तक प्रशासन को गुमराह भी किया गया, लेकिन जांच में सच्चाई सामने आ गई।
इस मामले में भी कुछ इसी तरह का घटनाक्रम हुआ। चार दिन से बच्ची का इलाज अस्पताल में चल रहा था।
न ही संस्था ने इसकी सूचना महिला बाल विकास को दी और न ही महिला बाल विकास के अफसरों ने निगरानी की।
विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी राम निवास बुधोलिया ने बताया कि उन्हें न ही बच्चे के इलाज के बारे में जानकारी है और न ही उसकी मौत के मामले में। जबकि इस पूरे मामले में शुरू से प्रशासन का सख्त रवैया रहा है।
प्रशासन की सख्ती का नहीं हुआ असर
प्रशासन ने जांच रिपोर्ट के बाद युगपुरुष धाम आश्रम के संचालिका अनिता शर्मा, अध्यक्ष जान्हवी ठाकुर और सचिव तुलसी शादीजा को पद से हटा कर इतिश्री कर ली थी। जबकि इस संवेदनशील मामले में आश्रम की कार्यप्रणाली पर सतत निगरानी की जानी थी।
आश्रम ने केवल 6 बच्चों की मौत मानी थी
बता दें कि जुलाई माह की शुरुआत में लगातार बच्चों की मौत के मामले में आश्रम की ओर से सिर्फ छह बच्चों की मौत स्वीकारी गई थी, लेकिन प्रशासन की जांच में 10 बच्चों की मौत के प्रमाण सामने आए। संचालकों ने बच्चों की मौत की जानकारी छुपाई और गुपचुप तरीके से स्वजन को शव सौंप दिए। इन बच्चों का पीएम भी नहीं कराया गया।
कांग्रेस नेता को बयान के लिए पुलिस ने बुलाया
आश्रम में बच्चों की मौत के मामले में डीजीपी के निर्देश पर पुलिस ने फिर से जांच शुरू की है। कांग्रेस के प्रदेश महासचिव राकेशसिंह यादव को सोमवार को मल्हारगंज थाने पर बयान के लिए बुलाया गया। यादव ने संस्था के कर्ताधर्ताओं पर सरकारी फंड हड़पने के लिए स्वामी परमानंद के नाम का गलत उपयोग करने व सरकारी अधिकारियों द्वारा आश्रम को नियम विरुद्ध एनओसी व प्रमाणपत्र देने की बात कही।
बीते महीने 10 बच्चों की मौत के बाद शोर मचा लेकिन स्थानीय प्रशासन ने मामले में एफआइआर दर्ज नहीं कराई। यादव ने डीजीपी को शिकायत की थी। इसके बाद पुलिस ने यादव को बयान के लिए बुलाया। उन्होंने अपने बयान में आश्रम संचालिका अनिता शर्मा, तुलसी शादीजा एवं रामनिवास बुधौलिया सहित युगपुरुष आश्रम संस्था के पदाधिकारियों को दोषी बताया है। कुछ दस्तावेज सौंपते हुए कहा कि संस्था में मौत की संख्या इससे ज्यादा है। एक आटो चालक का नाम भी बताते हुए कहा कि उसकी मदद से कुछ बच्चों को दफनाया गया था। साथ ही शिकायत की कि आश्रम में कई लड़कियों के गलत तरीके से लाड़ली लक्ष्मी योजना के खाते खुलवाए गए।
