- यहां स्त्री त्याग के लिए पहचानी जाती है, दुष्कर्म के मामले में समझौते के आधार पर एफआइआर निरस्त नहीं कर सकते।
- दुष्कर्म जैसे घृणित अपराध में समझौता स्वीकार्य नहीं है।
- यहां स्त्री अपने त्याग के लिए पहचानी जाती हैं।
- हमारा संविधान भी दुष्कर्म के मामले में समझौते की इजाजत नहीं देता।
दुष्कर्म जैसे घृणित अपराध में समझौता स्वीकार्य नहीं है। यह पवित्रधरा है, जहां पुरातनकाल से प्रचलित है कि यत्र नार्यस्तु पूज्यते रमंते तत्र देवता, यानी जहां स्त्रियों की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं। यहां स्त्री अपने त्याग के लिए पहचानी जाती हैं। हमारा संविधान भी दुष्कर्म के मामले में समझौते की इजाजत नहीं देता। प्रकरण में पीड़िता ने आरोपित से भले ही समझौता कर लिया हो, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के न्यायदृष्टांत भी कहते हैं कि केवल समझौते के आधार पर स्त्री की गरिमा के विरुद्ध किए गए ऐसे अपराध निरस्त नहीं किए जा सकते इस टिप्पणी के साथ हाई कोर्ट ने कांग्रेस नेता और पूर्व पार्षद अनवर दस्तक की ओर से धारा 482 के तहत प्रस्तुत याचिका को निरस्त कर दिया। एक महिला की शिकायत पर खजराना थाने में अनवर दस्तक के विरुद्ध 21 सितंबर 2022 को दुष्कर्म की धारा में प्रकरण दर्ज हुआ था। अनवर ने इस एफआइआर को निरस्त करने की गुहार लगाते हुए याचिका हाई कोर्ट में प्रस्तुत की थी। इसमें कहा था कि महिला ने मामले में समझौता कर लिया है। शासन की ओर से एडवोकेट राजेश जोशी ने आपत्ति लेते हुए कोर्ट के समक्ष तर्क रखा कि आरोपित आदतन अपराधी है और उसके विरुद्ध 12 अपराध दर्ज हैं। उसने अपने राजनीतिक प्रभाव के चलते पीड़िता से समझौता करवाया है। न्यायालय ने एडवोकेट जोशी के तर्कों को सुनने के बाद अनवर की याचिका खारिज कर दी।
