बीती सरकार की ‘पलकों’ पर काबिज रहने वाली ‘अफसरी’ को नई सरकार में भी यही गुमान था कि हाकिम भले ही बदल गए हैं लेकिन पार्टी तो वही है। सबकुछ पहले की तरह ही चलता रहेगा। लेकिन नए निजाम ने आते ही जिस तरह मुश्के कसना शुरू किया है उससे अफसर बिरादरी में खासी बेचैनी है। वाहन चालक से तल्ख लहजे में बात करने पर शाजापुर कलेक्टर को हटाकर यह संदेश भी दे दिया कि ‘मोहन राज’ में सबकुछ चलता है फार्मूला नहीं चल सकेगा। इस घटना के बाद मालवा-निमाड़ में तैनात वे आइएएस, आइपीएस, राज्य प्रशासनिक और पुलिस सेवा के अफसर सबसे ज्यादा परेशान हैं जिन्हें जुबां खोलते ही ‘फूल बरसाने’ की आदत है। मौका-दस्तूर देखे बिना धाराप्रवाह ‘शुद्ध वचनों’ का प्रयोग करने वाले अफसरों के कार्यालय से अब ऊंचे स्वर सुनाई नहीं पड़ रहे हैं। स्टाफ भी हैरान है कि साहब की इतनी चुप्पी तो कभी नहीं देखी। अब उन्हें कौन बताए कि साहब को पता है कि इस दौर में खामोशी ही स्थायित्व की गारंटी है। जुबां खुलते ही विस्थापन की तलवार लटक जाती है।
