शाजापुर जिले के पोलाय खुर्द में अनोखी परंपरा धधकते अंगारों पर निकालते हैं ग्रामीण

By Abhishek Raghuvanshi
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होली हमारी भारतीय संस्कृति में मनाएं जाने वाले प्रमुख त्योहारों में से एक है।जैसे कि हम देखते हैं कि हमारे
देश के अलग-अलग हिस्सों में होली का त्योहार में अलग-अलग मान्यताओं और परंपराओं का समागम देखने को मिलता है। रंगों का यह उत्सव कहीं फूलों से तो कहीं रंग गुलाल लगाकर तो कहीं लट्ठ बरसातें हुए मनाया जाता है।

वहीं शाजापुर जिले के पोलायकलां तहसील के समीपस्थ ग्राम पोलाय खुर्द में अनोखे अंदाज में इस रंगोत्सव की होली मनाई जाती है। होली पर यहां एक अनोखी और खतरनाक परंपरा का निर्वहन बरसों से ग्रामीणों द्वारा किया जा रहा है। अब इसे आस्था कहें या अंधविश्वास…यह एक बड़ा सवाल है…। हालांकि इस क्षेत्र के नागरिकों की मानें तो यह आस्था और विश्वास का मामला है। होलिका दहन के दूसरे दिन यानी धुलेंडी की रात को इस गांव में रहने वाले बड़े बुजुर्ग और बच्चों अपनी जान जोखिम में डालकर होली के धधकते अंगारो से नंगे पैर होकर गुजरते है। होली की इस अनोखी परंपरा को देखने वाले दंग रह जातें हैं। आपने कभी आग के जलते अंगारों पर चलकर होली खेले जाने के बारे में नहीं सुना होगा। इस पर यकीन कर पाना आपके लिए थोड़ा मुश्किल हो सकता है।. लेकिन पोलायकलां तहसील के गांव पोलाय खुर्द में होली के दिन गल महादेव के मंदिर प्रांगण में धधकते अंगारों पर चलने की परंपरा है। ऐसी ग्रामीणों की आस्था और मान्यता है कि यहां पर धधकते हुए अंगारों पर चलने से गल महादेव भक्तों की इच्छा पूरी करते हैं।
ग्रामीणों का मानना है कि बाबा आपदा और विमारियों से दूर रहते हैं

इस अनोखी परंपरा के बारे में पोलाय खुर्द गांव के ग्रामीणों का कहना है कि होली के दिन अंगारों पर चलने की परंपरा उनके गांव में कई वर्षों से चली आ रही है. गांव के बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक नंगे पैर धधकते अंगारों पर ऐसे चलते हैं, मानो सामान्य जमीन पर चल रहे हों ऐसा करने से बाबा गल महादेव उनके. गांव को आपदा और खुद को बीमारियों और संकटों से दूर रखते हैं ग्रामीण इस परंपरा को कई वर्षों से निभाते चले आ रहे हैं, ग्रामीणों का दावा है कि इतने गरम अंगारों पर चलने के बाद भी न तो उनके पैरों में छाले पड़ते हैं और न ही किसी तरह की तकलीफ होती है । ग्रामीणों ने बताया कि आयोजन शाम 9:00 बजे मंदिर प्रांगण में प्रारंभ होता है। जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं। जो गल महादेव की विशेष पूजा अर्चना के बाद में पालस की लकडी में आग लगाकर के अंगारे बनाए जाते हैं इसके बाद जलते हुए अंगारों से नंगे पैर ग्रामीणों के निकलने का सिलसिला शुरू होता है। जो करीब 30 मिनिट तक चलता है इस दौरान गल महादेव के यहां पर जो भी भक्त मन्नत मांगता है। बाबा भक्तों की मन्नत एक वर्ष में पूरी करते हैं। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि यह परंपरा उनके गांव में कब शुरू हुई, इस बात की कोई सटीक जानकारी तो उनके पास नहीं है।. लेकिन बुजुर्ग ग्रामीणों के अनुसार यह परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है।. इसलिए बुजुर्गों के कहने पर हर वर्ष गांव में यह परंपरा होली पर निभाई जाती है । क्योंकि पोलाय खुर्द संतो की तपस्या स्थली रही यहां सज्जन नाथ जी जैसे संत की समाधि स्थित है। वर्षों से चली आ रही परंपरा को आज भी लोग यहां निभा रहे हैं। होली के दिन यहां मेले के साथ चूल का आयोजन किया जाता है। जिन अंगारों से ग्रामीण निकलते हैं।

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