आबकारी घोटाले से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को नियमित जमानत दे दी है। विशेष न्यायाधीश न्याय बिंदु ने एक लाख रुपये के बांड पर जमानत दी है। ईडी के विशेष अधिवक्ता जोहेब हुसैन ने जमानत पर बेल बांड स्वीकार करने के लिए दो दिन की अवधि तय करने की मांग की, ताकि ईडी हाई कोर्ट में आदेश के खिलाफ अपील कर सके। मगर अदालत ने केजरीवाल के जमानत आदेश पर 48 घंटे के लिए रोक लगाने की ईडी की अपील को भी खारिज कर दिया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत आदेश पर कोई रोक नहीं हैं। अदालत ने कहा कि केजरीवाल के अधिवक्ता शुक्रवार को संबंधित न्यायाधीश के समक्ष जमानत बांड के लिए आवेदन कर सकते हैं। ऐसे में उम्मीद है कि शुक्रवार को प्रक्रिया पूरी कर मुख्यमंत्री तिहाड़ जेल से रिहा हो सकते हैं। सुनवाई के दौरान, ईडी ने अरविंद केजरीवाल को अपराध की आय और सह-अभियुक्तों से जोड़ने की मांग की थी, जबकि बचाव पक्ष ने दावा किया था कि अभियोजन पक्ष के पास केजरीवाल को फंसाने के लिए कोई सुबूत नहीं है।
केजरीवाल गोवा के होटल में रुके थे: ईडी
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान एएसजी एसवी राजू ने दलील दी कि सात नवंबर, 2021 को, केजरीवाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान गोवा के होटल ग्रैंड हयात में रुके थे और बिल का भुगतान सह-आरोपित चनप्रीत सिंह ने किया था। चनप्रीत ने उद्यमियों से भारी मात्रा में नकद राशि प्राप्त की थी। ईडी ने कहा कि ऐसा नहीं है कि ईडी हवा में जांच कर रही है, ईडी के पास मामले में ठोस सुबूत हैं। सह-आरोपित विनोद चौहान के फोन से करंसी नोट के फोटोग्राफ मिले हैं, जो कि दिए गए थे। चनप्रीत, विनोद से लगातार बातें करता था। विनोद चौहान के केजरीवाल से अच्छे संबंध थे।
केजरीवाल कहते हैं कि मेरे फोन में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है। मैं पासवर्ड नहीं बताऊंगा। इसलिए विनोद चौहान के फोन का सहारा लेना पड़ा। एएसजी ने आगे कहा कि सह-आरोपित विजय नायर, जो कि सरकार से जुड़ा भी नहीं था और आबकारी नीति बनाने में उसका कोई काम नहीं था, उसे केजरीवाल ने बिचौलिये के तौर पर इस्तेमाल किया और मुख्यमंत्री के साथ उसकी निकटता संदेह से परे साबित होती है।
‘केजरीवाल को 21 मार्च को ही क्यों गिरफ्तार किया गया’
ईडी की दलीलों का खंडन करते हुए केजरीवाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विक्रम चौधरी ने कहा कि आज की तारीख में केजरीवाल सीबीआई मामले में आरोपित नहीं हैं और इसके विपरीत, रिकार्ड में यह बात है कि सीबीआई ने उन्हें गवाह के तौर पर बुलाया था। सीबीआई को निर्देशित करना ईडी का काम नहीं है। सीबीआइ एक स्वतंत्र एजेंसी है जो खुद इस पर फैसला लेगी। चौधरी ने कहा कि उनके मुवक्किल को पहले क्यों नहीं गिरफ्तार किया गया। 21 मार्च को ही क्यों गिरफ्तारी हुई, आखिर ईडी केजरीवाल से क्या चाहती थी। चौधरी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि क्या ईडी एक स्वतंत्र एजेंसी है या यह कुछ राजनीतिक आकाओं के हाथों में खेल रही है।
