जानकारी के अनुसार, 29 फरवरी और 1 मार्च के दरमियान रात में स्कूल आफ लैंग्वेज में जनरल बॉडी मीटिंग चल रही थी. इस दौरान लेफ्ट और राइट विंग के छात्रों के बीच किसी बात को लेकर विवाद होने लगा. देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि मारपीट होने लगी.
दोनों गुटों के छात्र भिड़ गए और एक दूसरे पर हमला करने लगे. किसी ने लाठी डंडे चलाए तो किसी ने लात घूंसे से मारा. पूरी रात दोनों दलों के छात्रों के बीच हिंसा की स्थिति बनी रही.
अब इस मामले को लेकर दोनों ही छात्र दल एक दूसरे पर हिंसा फैलाने का आरोप लगा रहे हैं. लेफ्ट विंग छात्र इस पूरे मामले को एबीवीपी छात्रों की गुंडागर्दी बता रहे हैं. वहीं राइट विंग के छात्र कैंपस में इसे नक्सली अटैक कह रहे हैं.
बहरहाल कैंपस में छात्र संघ के चुनाव की तैयारी 4 साल बाद शुरू हो रही है. दोनों ही छात्र संगठनों के संघर्ष के बाद छात्र संघ के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो पाई है, लेकिन इससे पहले ही दोनों दलों के छात्रों के बीच हिंसा हो रही है. स्कूल आफ लैंग्वेज में जनरल बॉडी मीटिंग के दौरान हुई हिंसा के बाद कैंपस में शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव कराना प्रशासन के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण लग रहा है.
पूरे विवाद के बाद क्या बोले छात्रों और ABVP की ओर से क्या कहा गया?
Abvp प्रेसिडेंट उमेश चंद्र अजमेरा का कहना है कि EC मेंबर के चयन को लेकर झगड़ा हुआ. लेफ्ट के लोग बाहर के लोगों को बुलाते हैं. वहीं लेफ्ट विंग स्टूडेंट मधुरिमा कुंडू ने कहा कि एकतरफा अटैक था. कॉलेज ऑफ लैंग्वेज में जनरल बॉडी मीटिंग चल रही थी, वहां मारपीट की गई. दानिश नाम के छात्र को रोका गया था. लेफ्ट विंग के शौर्य ने कहा कि मुझे डंडे से मारा, दो अभी भी एडमिट हैं. एबीवीपी नहीं चाहता कि इलेक्शन हो. एक छात्र को रोक लिया था, उसके बाद झगड़ा हुआ.
