वैसे पूरे विश्व की धुरी(केंद्र) है अमेरिका, हालांकि चीन लगातार चुनोती देता आ रहा है अमेरिका को ओर साथ ही पुरे विश्व को,जिस प्रकार हर व्यक्ति का अपना अलग व्यवहार और कार्य शेली होती है उसी प्रकार हर देश की भी अपनी एक कार्य शेली होती है और पूरे विश्व मे चीन सबसे अलग है, एक उनकी काम के प्रति ओर देश के प्रति ईमानदारी,ओर दूसरा उनके अपने प्रतिद्वंदी के प्रति तेवर ओर सोच,जो बहुत ही अलग होती है, बहरहाल आगामी 5 नवम्बर को अमेरिका में चुनाव है और ऐसे चुनाव आज तक अमेरिका के इतिहास में नही हुवे है,कारण सिर्फ और सिर्फ डोनाल्ड ट्रम्प जो कि एक बिजनेसमैन के साथ साथ एक जिद्दी स्वभाव की शख्सियत माने जाते है,तो वही दूसरी तरफ कमला हैरिस एक महिला होने के साथ साथ वकील है और लोगो का उनके प्रति नजरिया भी सॉफ्ट है,हेरिस एक अमेरिकी राजनेत्री और वकील हैं जो 2021 से संयुक्त राज्य अमेरिका की 49वीं और वर्तमान उपराष्ट्रपति हैं। वे संयुक्त राज्य की पहली महिला उपराष्ट्रपति है।
कमला हेरिस ने 2020 के डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति पद के नामांकन की माँग की, लेकिन प्राइमरी से पहले दौड़ से बाहर कर दिया। पूर्व उपराष्ट्रपति जो बाइडेन ने कमला हैरिस को अगस्त 2020 में अपने चल रहे साथी के रूप में चुना, और बाइडेन-हैरिस टिकट ने नवंबर 2020 का चुनाव जीता। उन्होंने 20 जनवरी, 2021 को उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ली,एक तरफ ट्रम्प जैसा कि विदित है कि बिजनेसमैन है तो उनकी पूरी लॉबी भी उसी प्रकार है खास कर एलान मास्क ,जैसा कि हमारे भारत मे चंदा देने वाले उद्योगपतियों को शासकीय कार्य,ब्रिज,पुल इत्यादि बनाने का काम मिलता है उसी तरह एलन मस्क को भी अमेरिका सरकार से उनकी स्पेसएक्स ओर टेस्ला के लिए अमेरिका सरकार पर निर्भर रहना पड़ता है और उसी के चलते मस्क ने प्रतिदिन लाखो डॉलर हर रोज एक व्यक्ति को देने की भी घोषणा की थी,वैसे यह महज एक प्रचार का हिस्सा ही है ताकि सभी का ध्यान ट्रम्प की ओर आकर्षित हो और वो वोट में तब्दील हो, हालांकि ट्रम्प के साथ सभी बड़े टाइकूनस की फ़ौज है तो वही हेरिस के साथ रियल स्टेट ओर अन्य व्यवसायियों की जो कमला हेरिस की नीति को पसंद करते है, इस बार अमेरिका के चुनाव के इतिहास में सभी वोटरों में वहम सी स्थिति है ,ट्रम्प द्वारा बार बार यह प्रचारित किया जा रहा है कि चुनाव में बहुत बड़ी गड़ बड़ी होने की सम्भावनाए है,जैसा कि हमारे यहां भी यही सब चलता है आज अमेरिका को भी इस वायरस ने अपनी गिरफ्त में लें लिया है,जब 2016 में ट्रम्प चुनाव लड़ने आए तो उनके जितने की जो वजह थी वो यह थी कि एक तो वो गेर राजनीति पृष्टभूमि से थे तो दूसरा वे बहुत बेबाक ओर स्पष्टवादी,जिन बातों को बोलने में कोई भी राजनेता झिझकता था उसे वो बेखोफ बोल देते थे ,वही उसी के उलट जब 2020 के चुनाव तक उनकी कई बेतुकी टिप्पणियां नस्लभेद को लेकर बयान याने उनका पूरा कार्य काल विवादस्पद रहा और वे चुनाव हार गए और उसी हार को अब जीत में तब्दील करने की उनकी सनक (जिद) ने आज अमेरिकी चुनाव को एक दंगल के रूप मे ला खड़ा कर दिया है वही साम दाम,दंड, भेद जो भारत मे अपनाए जाते है वही शिक्षा (चुनाव लड़ने के तरीका) अध्धयन अब अमेरिका में अपनाया जा रहा है,चुकी अमेरिका हर मामले मे भारत से आगे है तो चुनाव रणनीति में कैसे पीछे रह जाये ? तो चुनाव में गड़बड़ी के अनुमान ओर विपक्ष पर दबदबा बनाने के लिए चुनाव पूर्व ही गड़बड़ी की 70 से ज्यादा याचिका अदालत में पहले ही लगा दी है, ताकि जनता को बरगलाया जा सके, तो अब यहां यह कहना अतिश्योक्ति नही होगा कि इस बार का चुनाव भारत के चुनाव पद्धति से लड़ा जा रहा है,अगर ट्रम्प जीत जाते है तो सकरी गली से निकल कर राष्ट्रपति पद की शपथ ले लेंगे और हार गए तो उसी तरह का दृश्य क्रिएट करेगे जैसा पिछले चुनाव में हार के वक्त किया था, उस समय आगाज भले ही कम रहा हो मगर इस बार अंजाम बहुत अलग होगा ओर यह देखना भी बहुत रोचक होगा,ऐसा मेरा मानना है।
