भारतवर्ष में हिंदी पत्रकारिता दिवस की धूम जानिए इस दिन को मनाने का महत्व

By Abhishek Raghuvanshi
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हिंदी के पहले समाचार पत्र उदन्त मार्तंड (1826) से हिंदी पत्रकारिता की शुरुआत मानी जाती है जिसके संपादक पंडित जुगल किशोर थे। चूंकि साप्ताहिक समाचार पत्र उदन्त मार्तण्ड की शुरुआत 30 मई 1826 के दिन हुई थी, इसलिए 30 मई को प्रति वर्ष हिंदी पत्रकारिता दिवस के रूप में मनाया जाता है…

आज भारतवर्ष में हिंदी पत्रकारिता दिवस की धूम है। ऐसे में हिंदी पत्रकारिता दिवस के बहाने हिमाचली मीडिया पर चर्चा करना बेमानी न होगा। हिमाचल प्रदेश एक पर्वतीय प्रदेश है। यहां की आबादी दूरदराज के गांवों से लेकर ऊंचे पहाड़ों में कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन करती है। जब प्रदेश में सडक़ों का विस्तार नहीं हुआ था और वर्तमान की तरह इंटरनेट आधारित संचार सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं तो आप सहज कल्पना कर सकते हैं कि किस प्रकार से यहां के लोगों की बौद्धिक एवं साहित्यिक अभिरुचियों का परिमार्जन हुआ होगा? कैसे उन्हें समाचारपत्र, पत्रिकाएं, पुस्तकें और साहित्य की सामग्री मिलती रही होगी और कैसे हिमाचल प्रदेश का हिंदी मीडिया अपने उद्भव, उत्थान से आगे बढक़र पर्वतीय प्रदेश की पत्रकारिता और साहित्यिक सरोकारों के बरक्स खरा उतरा होगा? शायद इसलिए कहा भी जाता है कि पर्वतीय प्रदेश में पत्र-पत्रिका का प्रकाशन पत्थर से पानी निकालने के समतुल्य है। हिमाचल प्रदेश यूं तो पर्वतीय राज्य है और पहाड़ी यहां की मुख्य बोली है, तथापि कई जिलों और उपमंडलों की अपनी-अपनी बोलियां भी हैं जो पूरे प्रदेश में भिन्नता लिए हुए हैं। सरकारी कामकाज की प्रथम भाषा के रूप में हिंदी को मान्यता प्राप्त है और बीते तीन-चार दशकों से पठन-पाठन, घरों-स्कूलों में सामान्य बोलचाल की भाषा के रूप में हिंदी ने अपने जड़ें मजबूत की हैं।

ऐसे दौर में स्वाभाविक है कि हिमाचल प्रदेश में हिंदी मीडिया की भूमिका भी बढ़ी है। हिमाचल प्रदेश में पत्रकारिता अथवा हिंदी मीडिया का उदय, उद्भव उन्नीसवीं सदी के पांचवें दशक में शिमला से ‘मॉर्निंग मॉनिटर’ के प्रकाशन से हुआ था। सन 1848 में शिमला से द शिमला इंटेलिजेंसर, शिमला एडवरटाइजर, शिमला गार्जियन, द शिमला वीकली, टाइम्स लिटिल वीकली आदि का प्रकाशन होता था और इनके संपादक भी अंग्रेज ही होते थे। इसी वर्ष पहले भाषाई समाचार पत्र ‘शिमला अखबार’ का प्रकाशन शेख अब्दुल्ला द्वारा किया गया था और हिमाचल में भाषाई पत्रकारिता का श्रीगणेश इसी से माना जाता है। तब से लेकर वर्तमान समय तक हिमाचल प्रदेश में पत्रकारिता में अनेक उतार-चढ़ाव आए हैं। यह खुशी की बात है कि वर्तमान समय में भी क्षेत्रीय, प्रादेशिक और हिमाचली संस्करणों सहित राष्ट्रीय समाचार पत्रों का प्रकाशन हिमाचल की पुण्य धरा से हो रहा है। समाचार पत्र और पत्रिकाएं मानव समाज की दिशा निर्देशिका मानी जाती हैं। समाज के भीतर घटित घटनाओं से लेकर परिवेश की समझ उत्पन्न करने का कार्य पत्रकारिता का प्रथम कर्तव्य एवं महत्वपूर्ण दायित्व है। पाठकों में राजनीतिक, सामाजिक चिंतन की समझ पैदा करने के साथ विचार की सामथ्र्य उत्पन्न करने में इनकी प्रमुख भूमिका शुरू से ही रहती आई है। यह खुशी की बात है कि हिमाचली पत्रकारिता और साहित्य लेखन ने अपने इस दायित्व का बखूबी निर्वहन किया है। इसी प्रकार से हिंदी साहित्य और पत्रकारिता का आपस में अन्योन्याश्रित संबंध है।

हिमाचल प्रदेश में बीते 5 दशकों से साक्षरता बढऩे और लोगों की साहित्यिक अभिरुचियों के परिष्कृत होने तथा वर्तमान में इंटरनेट के बढ़ते उपयोग से सोशल मीडिया के दौर में लोगों के रचनात्मक क्रियाकलापों में भी व्यापक परिवर्तन आया है, तथापि संतोष की बात है कि अभी भी समाचारपत्रों ने पाठकों के एक बड़े वर्ग को अपने साथ जोड़े रखा हुआ है। जहां तक हिमाचल के दैनिक समाचार पत्रों में साहित्यिक पत्रकारिता का सवाल है तो मोबाइल एवं इंटरनेट के जमाने में जब लोगों का रुझान पारंपरिक रूप से पुस्तकें पढऩे की ओर से घटा है, तो समाचार पत्रों ने इस गैप को भरने का कार्य बखूबी किया है। आज के दौर में अखबारों ने समाचारों के अलावा खोजी पत्रकारिता, कविता, कहानी, गजल, गीत, निबंध, लघु कथाएं, एकांकी, संस्मरण, यात्रा वृतांत, शब्द चित्र, सामान्य ज्ञान, पाठकों के पत्र, रिपोर्ताज, पुस्तक समीक्षाएं, आलोचना, बच्चों का कोना, उपन्यास और आलेखों को समावेशित करके गागर में सागर भरने जैसा कार्य किया है। इसके अतिरिक्त समाचार पत्र धार्मिक, मनोरंजन, प्रेरणास्पद और सामान्य ज्ञान के विशेष परिशिष्ट प्रकाशित कर अपने पाठकों को एक जगह समस्त मूल्यवान जानकारी एवं साहित्य उपलब्ध करवा रहें हैं। हिमाचल प्रदेश में हिंदी समाचार पत्रों ने लोगों को साहित्य पढऩे की ओर प्रवृत्त करने के लिए साप्ताहिक विशेषांक भी शुरू किए हैं।

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हिमाचली मीडिया में ऐसे बहुत से श्रेष्ठ संपादक हैं जिनकी साहित्यिक सोच, ज्ञान, योग्यता और अभिरुचि से उनके द्वारा संपादित दैनिक समाचार पत्रों की भाषा, वस्तु विषय, कलेवर, साहित्यिक सामग्री से उस पत्र की ख्याति बढ़ी है और पाठकों का एक बड़ा वर्ग उनकी ओर आकर्षित हुआ है। अनेक समाचार पत्रों द्वारा हिमाचली मुद्दों पर लेखन के लिए प्रादेशिक लेखकों को प्रोत्साहित करने से पिछले दो दशकों में कई हिमाचली लेखक अपनी शानदार लेखनी एवं आलेखों के बलबूते पत्रकारिता के आसमान में उज्ज्वल नक्षत्र बनकर चमक बिखेर रहे हैं। आवश्यकता है कि मीडिया हाउस ऐसे स्तंभकारों को सम्मानित कर उनकी हौसला अफजाई भी करें। यह सत्य है कि भारतीय पत्रकारिता की उद्भव भूमि कोलकाता रही है, लेकिन हिंदी मीडिया को उसके शिखर तक ले जाने और संवर्धन का श्रेय काशी/इलाहाबाद को जाता है। काशी (वाराणसी) और प्रयागराज को साहित्यकारों/पत्रकारों की उद्गम स्थली भी कहा जाता है। हिंदी के पहले समाचार पत्र उदन्त मार्तंड (1826) से हिंदी पत्रकारिता की शुरुआत मानी जाती है जिसके संपादक पंडित जुगल किशोर थे। चूंकि साप्ताहिक समाचार पत्र उदन्त मार्तण्ड की शुरुआत 30 मई 1826 के दिन हुई थी, इसलिए 30 मई को प्रतिवर्ष हिंदी पत्रकारिता दिवस के रूप में मनाया जाता है। आज हिंदी पत्रकारिता दिवस के पावन अवसर पर सभी प्रबुद्ध पाठकों, लेखकों, पत्रकारों और साहित्यकारों को बहुत-बहुत हार्दिक बधाइयां एवं शुभकामनाएं।

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