दो दशक से दिल्ली में गैंगवार: यमुना पार में लगातार जारी है तीनों का खूनी खेल, पढ़ें शुरू से दुश्मनी की दास्तां

By Abhishek Raghuvanshi
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दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि गैंगस्टर हाशिम बाबा और डॉन अकील मलिक उर्फ मामा के बीच 2009 में वर्चस्व की जंग चल रही थी। इसी दौरान हथियारों की सप्लाई से जुड़े नासिर और अकील मामा में ठन गई। नासिर के करीबी दोस्त आतिफ सैफी ने कारोबारी और छेनू के करीबी हाजी मतीन के बेटी से भागकर शादी कर ली। यहां से गैंगवार की शुरुआत हो गई। आतिफ की 15 मई 2011 को हत्या हो गई। इसमें अकील मामा का नाम सामने आया। नासिर ने हाशिम बाबा से हाथ मिला लिया।

आतिफ की हत्या का बदला लेते हुए नासिर, हाशिम और इमरान सैफी ने हाजी मतीन का मई 2012 में हत्या कर दी। इसके बाद अकील की भी नवंबर 2013 हत्या कर दी गई। अब अकील मामा के गैंग की कमान इरफान उर्फ छेनू पहलवान ने थाम ली। इसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा गया। जेल से अंदर बाहर होने के बाद सभी गैंगस्टर एक दूसरे के गैंग पर हमला करते रहे। नासिर के जेल जाने के बाद उसके गैंग की कमान हाशिम बाबा ने संभाल ली।

धीरे-धीरे नासिर गैंग में हाशिम का दबदबा बढ़ने लगा। दिल्ली में उसे नासिर के बराबर का गैंगस्टर माना जाने लगा। कुछ समय बाद नासिर जेल से वापस आ गया। नासिर के जेल से वापस आने के बाद दोनों में गैंग का लीडर बनने को लेकर झगड़ा शुरू हो गया, नौबत गैंगवार तक आ गई। गैंगवार में दोनों ओर से कई लड़के मारे गए। इसके बाद हाशिम ने नासिर गैंग पर कब्जा छोड़ खुद का एक अलग गैंग बना लिया। अब उसको हाशिम बाबा गैंग के नाम से जाने जाने लगा।

इस बीच लगातार छेनू और नासिर की दुश्मनी जारी रही। दोनों गैंग के बीच 2018 में सीलमपुर के मौलवियों और इलाके मुआजिज लोगों ने समझौता करा दिया। इसके लिए नासिर पैरोल पर जेल से बाहर आया था, जबकि छेनू को जेल से लाइन पर लिया गया। लेकिन महज छह महीने बीते थे, 11 जनवरी 2019 को बेटी की कब्र पर फातिया पढ़ने गए महफूज नामक युवक की हत्या कर दी गई। वह छेनू गैंग का करीबी था। आरोप नासिर गैंग पर लगा। राशिद भी इस हत्या में शामिल था।

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छेनू गैंग से जुड़े फैजल शाह उर्फ अनस ने महफूज मर्डर के मुख्य आरोपी सलीम के भाई की मई 2019 में हत्या कर पहला बदला लिया। इसके बाद नासिर के सबसे करीबी और गैंगवार में सबसे पहले मारे गए आतिफ के बड़े भाई इमरान सैफी को जुलाई 2019 की रात मौत के घाट उतार दिया गया। नासिर ने 18 जुलाई 2019 को राजनीति में एंट्री करते हुए केंद्रीय मंत्री राम दास अठावले की पार्टी आरपीआई की सदस्यता ली थी। मीडिया में मामला आने के बाद नासिर को पार्टी से निकाल दिया गया। इसके बाद पुलिस ने उसे दबोच लिया।

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