दिल्ली में 997 बसों को हटाने का दिया फरमान, फैसले पर परिवहन मंत्री भी हैरान

By Abhishek Raghuvanshi
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बिना कोई वैकल्पिक व्यवस्था के 19 जून से एक साथ चार क्लस्टरों की 109 रूटों पर चलने वाली 997 क्लस्टर बसों का परिचालन रोकने के परिवहन विभाग के निर्णय पर दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने भी हैरानी जताई है। उन्होंने ट्रांसपोर्ट कमिश्नर प्रशांत गोयल को एक नोट लिखकर पूछा है कि इतनी सारी बसों को एक साथ सड़कों से हटाने के बाद लोगों को बसों की किल्लत का सामना ना करना पड़े और कोई अव्यवस्था पैदा ना हो, इसके लिए परिवहन विभाग ने क्या वैकल्पिक योजना बनाई है और बसों की क्या व्यवस्था की है? उन्होंने नोट में साफ लिखा है कि बिना किसी वैकल्पिक इंतजाम के 997 बसों को एक साथ सड़कों से हटाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

19 जून को खत्म हो रहा है बसों का कॉन्ट्रैक्ट
परिवहन विभाग के सूत्रों के अनुसार, क्लस्टर 6, 7, 8 और 9 के तहत बसें ऑपरेट करने वाली कंपनियों का कॉन्ट्रैक्ट 19 जून को खत्म हो रहा है। क्लस्टर 6 के तहत बंदा बहादुर मार्ग-2 और दिलशाद गार्डन डिपो से, क्लस्टर 7 के तहत राजघाट और सीमापुरी डिपो से, क्लस्टर 8 के तहत कैर डिपो से और क्लस्टर 9 के तहत ओखला और दिचाऊं कलां डिपो से बसें ऑपरेट होती हैं, जो दिल्ली के बड़े हिस्से को कवर करती हैं। खासकर दिल्ली के कई ग्रामीण इलाकों में इन्हीं क्लस्टरों की बसें चलती हैं, जिनमें रोज लाखों लोग यात्रा करते हैं। ऐसे में एक साथ इन बसों के हटने से लोगों को भारी दिक्कत होने की आशंका है।परिवहन मंत्री ने उठाया सवाल
परिवहन मंत्री ने यही सवाल उठाते हुए नोट में लिखा है कि अभी तो डिपोज के इलेक्ट्रिफिकेशन का फाइनैंशनल एप्रूवल होना भी बाकी है। उसके बाद 12 से 18 महीने डिपो में इलेक्ट्रिफिकेशन का काम पूरा करने में लगेंगे। इस दौरान ये डिपोज भी बिना किसी इस्तेमाल के खाली पड़े रहेंगे। परिवहन विभाग ने इस बारे में भी कोई वैकल्पिक सुझाव नहीं दिया है कि तब तक इन डिपोज का क्या इस्तेमाल किया जाएगा। परिवहन मंत्री का मानना है कि इतनी सारी बसों को सड़कों से हटा देने के कारण लोग फिर से प्राइवेट गाड़ियों का इस्तेमाल करने पर मजबूर हो जाएंगे, जिससे सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के दिल्ली सरकार के प्रयासों को गहरा धक्का लगेगा और दिल्ली के पर्यावरण पर भी इसका बहुत नकारात्मक असर पड़ेगा।

पहले भी कंपनियों का कॉन्ट्रैक्ट किया जा चुका है एक्सटेंड
इससे पहले जब क्लस्टर 2, 3, 4 और 5 का कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने वाला था, उस समय भी लोगों को परेशानी से बचाने के लिए पहले से बसें ऑपरेट कर रही कंपनियों का कॉन्ट्रैक्ट कुछ समय के लिए एक्सटेंड किया गया था। उसी दौरान क्लस्टर 3 और 4 के तहत नई बसों का परिचालन शुरू किया गया था। हालांकि, यह शर्त भी रखी गई थी कि कंपनियां 10 साल से ज्यादा पुरानी बसें सड़कों पर नहीं उतारेंगी। जरूरत पड़ने पर कंसेशनरी एग्रीमेंट को 6-6 महीने करके चार बार यानी दो साल तक के लिए बढ़ाया जा सकता है, लेकिन इस बार परिवहन विभाग ने ऐसी किसी सिफारिश पर गौर नहीं किया और बसों को सीधे फेज आउट करने का निर्णय ले लिया, जिसको लेकर अब खुद परिवहन मंत्री ने सवाल उठाए हैं।

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