अमेरिका ने अरब देशों में चीन के प्रभाव को कम करने के लिए एक प्रोजेक्ट की शुरुआत की है। इसमें भारत को भी शामिल किया गया है। इसके लिए भारत के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजीत डोभाल ने रविवार को अमेरिका, सऊदी अरब और UAE के सुरक्षा सलाहकारों से मुलाकात की है। इसका खुलासा न्यूज वेबसाइट ‘एक्सियस’ ने किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक चारों देशों के बीच खाड़ी देशों को अरब देशों से जोड़ने के लिए रेलवे प्रोजेक्ट पर बात हुई। इस रेलवे नेटवर्क को बंदरगाह और शिपिंग लेन के जरिए भारत से भी जोड़ा जाएगा। ये प्रोजेक्ट शुरू करने के पीछे चीन के बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट को बताया जा रहा है। रिपोर्ट में लिखा गया है कि ये व्हाइट हाउस का बड़ा प्रोजेक्ट है।
18 महीनों से प्रोजेक्ट पर चर्चा जारी थी
- व्हाइट हाउस के प्रोजेक्ट के लिए I2U2 फोरम के तहत पिछले 18 महीनों से बातचीत हो रही है। इस फोरम में अमेरिका, इजराइल, भारत और UAE शामिल हैं।
- ये फोरम मिडल ईस्ट में इंफ्रास्ट्रचर प्रोजेक्ट की रणनीति तय करने के लिए 2021 में बनाया गया था।
- फोरम में शामिल एक इजराइली अधिकारी ने एक्सियस को बताया कि महीनों से हो रही बातचीत में किसी देश ने चीन का नाम नहीं लिया, लेकिन ये चीन को लेकर बनाया जा रहा है ये सब जानते हैं।
- मिडल ईस्ट में चीन के असर को कम करने के इस प्रोजेक्ट का आइडिया भी इजराइल ने दिया था। भारत की इंफ्रास्ट्रचर प्रोजेक्ट में एक्सपर्टीज को देखते हुए इसमें शामिल किया गया है।
अमेरिका के सुरक्षा सलाहकार ने हिंट दिया
बाइडेन प्रशासन ने हाल की महीनों में सऊदी अरब को भी इस प्रोजेक्ट में जोड़ने का प्रस्ताव रखा था। इसके बाद दूसरे देशों की हामी के बाद उसे भी शामिल किया गया। वहीं, इजराइल इस प्रोजेक्ट से जुड़ी चर्चाओं में शामिल रहा है, हो सकता है कि आने वाले समय में वो भी इस प्रोजेक्ट से जुड़े।
वहीं, अमेरिका के सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने गुरुवार को वॉशिंगट में एक इंस्टिट्यूट में दी गई स्पीच में इस प्रोजेक्ट का हिंट दिया था। उन्होंने कहा था, आप मेरे भाषण से सब भूल सकते हैं, पर I2U2 को नहीं। आने वाले समय में आप इसके बारे में और भी चर्चाएं सुनेंगे।
प्रोजेक्ट से जुड़ने में छिपे भारत के 3 मकसद
इंडियन एक्सप्ररेस की रिपोर्ट के मुताबिक चीन लगातार पश्चिमी एशिया में अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। चीन की अगुआई में हाल ही में सऊदी अरब और ईरान के बीच समझौता हुआ उसने अमेरिका के साथ-साथ भारत को भी चौंका दिया। इस समझौते से पश्चिमी एशिया में भारत के हित भी प्रभावित हो सकते हैं।
प्रोजेक्ट के तहत अगर गल्फ और अरब के बीच के रेलवर्क नेटवर्क को समुद्री मार्ग से दक्षिण एशिया से जोड़ा जाता है तो इससे भारत तक तेजी और कम लागत में तेल और गैस पहुंचेगी। इस कनेक्टिविटी से खाड़ी देशों में रहने वाले भारत के 80 लाख लोगों को भी फायदा होगा।
दूसरी अहम बात ये होगी कि इससे भारत की रेलवे सेक्टर में एक इन्फ्रास्ट्रक्चर बिल्डर के तौर पर ब्रांडिंग होगी।
सरकार को लगता है कि भारत का अपने पश्चिम के पड़ोसियों के साथ कनेक्टिविटी पर पाकिस्तान की वजह असर पड़ा है। इससे उनके साथ रिश्ते बेहतर करने के लिए कई ओवरलैंड रूट बंद हो गए हैं। उदाहरण के लिए चाहबार (ईरान) , बंदर ए अब्बास (ईरान) दुक्म (ओमान) जेद्दाह (सऊदी अरब) और कुवैत सिटी। इस चुनौति से निपटने में अब नया रेलवे प्रोजेक्ट भारत की मदद करेगा।
