यूरोपीय देश लिथुएनिया में 2 दिन तक चली नाटो समिट यूक्रेन की सदस्यता पर बिना कोई अहम स्टैंड लिए ही खत्म हो गई। यूक्रेन को समिट में नाटो की सदस्यता पर बड़ी घोषणा होने की उम्मीद थी। इसके बदले उसे सुरक्षा के सहयोग का आश्वासन मिला।
वहीं, रूस ने नाटो समिट के दौरान पुतिन के खिलाफ हुई बयानबाजी पर पलटवार किया है। रूस के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि नाटो देश शीतयुद्ध के हथकंडों को अपना रहे हैं। इसे पैदा होने वाले खतरे का जवाब हम हर तरह से देने के लिए तैयार हैं।
वहीं, इस समिट में स्वीडन की सदस्यता का रास्ता भी साफ हो गया है।
बाइडेन ने पुतिन को सत्ता का लालची बताया
नाटो की बैठक में यूक्रेन को लंबी रेंज वाले हथियार देने की भी घोषणा हुई है। इस पर रूस ने कहा है कि अमेरिका के नेतृत्व में चंद देश जंग को लंबा खींचने के लिए ऐसा कर रहे हैं। वहीं, समिट के आखिरी दिन अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने पुतिन के खिलाफ बयानबाजी की।
उन्होंने कहा- पुतिन जमीन और सत्ता के लालची हैं, यूक्रेन पर हमला करते हुए उन्हें लगा था कि वो नाटो को तोड़ देंगे। पर वो गलत थे। नाटो अब और भी ताकतवर और एकजुट है। इसके जवाब में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा है कि यूक्रेन को F-16 फाइटर जेट्स देकर नाटो देश रूस को परमाणु खतरे की तरफ धकेल रहे हैं। उन्होंने कहा- नाटो और अमेरिका की सैटेलाइट्स सीधे रूस से जंग का खतरा पैदा कर रही हैं, इसका अंजाम खतरनाक हो सकता है।
200 साल, 2 विश्व युद्ध में तटस्थ रहा स्वीडन यूक्रेन हमले से नाटो में शामिल
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की मध्यस्थता से आखिरकार तुर्किये ने नाटो में स्वीडन के शामिल होने का रास्ता साफ कर दिया है। यूक्रेन पर रूस के हमले के 16 महीनों बाद नाटो का विस्तार बड़ी सफलता है। एक साल में नाटो में 2 नॉर्डिक देशों (फिनलैंड और स्वीडन) की सदस्यता से उसे उत्तरी यूरोप में रूस के खिलाफ नया रक्षा कवच मिलेगा।
मार्च 2022 में यूक्रेन में रूस के हमले के बाद स्वीडन और फिनलैंड दोनों अपनी बरसों पुरानी तटस्थता की नीति को छोड़ते हुए अप्रैल 2022 में नाटो की सदस्यता के लिए आवेदन किया था। फिनलैंड नाटो में 31वां सदस्य बन गया, लेकिन नाटो के मौजूदा सदस्यों तुर्किये और हंगरी के विरोध के चलते स्वीडन की सदस्यता अटक गई थी।
अब वह नाटो का 32वां साथी बनने जा रहा है। स्वीडन के इस फैसले से न सिर्फ नाटो की ताकत बढ़ेगी, बल्कि रूस को रोकने में मदद मिलेगी। फिनलैंड के बाद स्वीडन के नाटो में आने से यूरोप को उत्तर में रूस खिलाफ मजबूत सेफ्टी वॉल मिलेगी।
1814 के बाद किसी युद्ध में शामिल नहीं हुआ है स्वीडन
स्वीडन ने 200 साल में कोई भी बड़ा युद्ध नहीं लड़ा है। आखिरी बार 1814 में स्वीडन-नॉर्वे युद्ध हुआ था। दोनों विश्व युद्ध में भी स्वीडन तटस्थ रहा था। स्वीडन नाटो सक्रिय सहयोगी रहा है। उसने इराक, अफगानिस्तान में शांति सेना भेजी थी, लेकिन रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद स्वीडन अपनी निर्गुट विचारधारा छोड़ने को मजबूर हो गया।
स्वीडन और फिनलैंड की सैन्य ताकत
| सैन्य ताकत | फिनलैंड | स्वीडन |
| सैनिक | 2.57लाख | 24,600 |
| टैंक | 100 | 120 |
| फाइटर जेट | 107 | 96 |
| हेलीकॉप्टर | 19 | 106 |
| बख्तरबंद गाड़ियां | 613 | 1064 |
| तोप | 672 | 357 |
नाटो: किसी भी सदस्य देश पर हमले होने पर सभी देश एक साथ जवाब देते हैं
- फिनलैंड की 1340 किमी लंबी सीमा रूस से जुड़ी है। अगर फिनलैंड को कुछ होता है तो स्वीडन से होकर नाटो सेना फीनलैंड-रूस बॉर्डर तक पहुंच सकती है।
- स्वीडन के नाटो में आने के बाद रूस की न सिर्फ जमीनी सीमा बल्कि समुद्री सीमा पर नाटो की निगरानी बढ़ेगी। नाटो को स्वीडन की लोकेशन से फायदा मिलेगा।
- बाल्टिक सागर में स्थित स्वीडन के गोटलैंड द्वीप के होने से नाटो वहां पर नौसेना का बेस बनाकर रूस की परमाणु सबमरीन की गतिविधियों पर नजर भी रख सकेगा।
इनसाइड स्टोरी: बाइडेन ने 45 मिनट बात की, एर्दोगन माने
रविवार को अमेरिकी एयरफोर्स वन विमान अटलांटिक महासागर पर उड़ रहा था। तब अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन ने स्वीडन को नाटो की सदस्यता के मामले में तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन से फोन पर बात की थी। लिथुआनिया में नाटो की बैठक से पहले एर्दोगन ने कई शर्तें रख दी थी, लेकिन 45 मिनट की चर्चा में बाइडेन ने भरोसा दिलाकर उन्हें राजी कर लिया।
एर्दोगन की डिमांड
- एफ-16 जेट डील को मंजूरी मिले।
- तुर्किये को ईयू की सदस्यता मिले।
- स्वीडन तुर्किये विरोधियों पर एक्शन लें
बाइडेन का जवाब
- एफ-16 डील वे खुद नजर रखेंगे।
- अमेरिका ईयू से इसकी बात करेगा।
- स्वीडन सख्त कार्रवाई करेगा।
- इसके बाद एर्दोगन ने स्वीडन के नाटो में शामिल होने को मंजूरी दे दी।
