मस्क बोले- ट्रूडो अभिव्यक्ति की आजादी कुचल रहे:कहा- ये शर्मनाक; कनाडाई PM ने फ्रीडम ऑफ स्पीच का हवाला देकर लिया था खालिस्तानियों का पक्ष

By Abhishek Raghuvanshi
4 Min Read
तस्वीर कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की है। (फाइल) - Dainik Bhaskar
तस्वीर कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की है।

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो जिस अभिव्यक्ति की आजादी की दलील देकर खालिस्तानियों का समर्थन करते हैं। अब उसी को लेकर एलन मस्क ने ट्रूडो को घेरा है। मस्क ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (ट्विटर) पर लिखा है कि ये शर्मनाक बात है कि जस्टिन ट्रूडो कनाडा में अभिव्यक्ति की आजादी पर रोक लगाना चाहते हैं। दरअसल, कनाडा ने हाल ही में ऑनलाइन सेंसरशिप को लेकर नए नियम जारी किए हैं।

इसके तहत सभी ऑनलाइन स्ट्रीमिंग सर्विसेज को सरकार के साथ रजिस्टर होना होगा। अमेरिका के पत्रकार ग्लेन ग्रीनवॉल्ड के मुताबिक ये दुनिया के सबसे कठोर नियम हैं। इससे सरकार ऑनलाइन कंटेंट को पूरी तरह से अपने कंट्रोल में रखेगी।

तस्वीर एलन मस्क के ट्वीट की है।

खालिस्तानियों पर ट्रूडो ने कहा था- हम बोलने का अधिकार नहीं छीन सकते
भारत-कनाडा विवाद शुरू होने से पहले ट्रूडो G-20 समिट में शामिल होने के लिए नई दिल्ली आए थे। तब भारत ने कनाडा में खालिस्तानियों का मुद्दा उठाया था। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था- कनाडा में भारतीय डिप्लोमैट्स के खिलाफ हिंसा बढ़ रही है, भारतीय नागरिकों और उनके धार्मिक स्थलों पर हो रहे हमले हो रहे हैं। इनके खिलाफ स्ट्रिक्ट एक्शन लिया जाना चाहिए।

- Advertisement -

वहीं, बैठक के बाद खालिस्तान के मुद्दे पर ट्रूडो ने कहा- बीते कुछ सालों में मेरी PM मोदी से इस मुद्दे पर बात हुई है। हम हमेशा से अभिव्यक्ति की आजादी का समर्थन करते हैं। शांतिपूर्ण प्रदर्शन सभी का अधिकार है।

ट्रूडो ने कहा- इसके साथ ही हम हिंसा का विरोध करते हैं और किसी भी तरह की नफरत की भावना को दूर करेंगे। ये ध्यान रखना चाहिए कि कुछ लोगों के एक्शन पूरे कनाडा की सोच को नहीं दर्शाते हैं। हम कानून की इज्जत करते हैं।

G20 बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ कनाडा के PM जस्टिन ट्रूडो

ट्रूडो ने ट्रक ड्राइवरों के खिलाफ इस्तेमाल की थी आपातकालीन शक्तियां
2022 में भी ट्रूडो सरकार ने आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल किया था, यह कनाडा के इतिहास में पहली बार हुआ था। दरअसल, कोरोना महामारी के दौरान वैक्सीन को लेने की अनिवार्यता के खिलाफ ट्रक ड्राइवरों ने प्रदर्शन किया था। तब हालात को नियंत्रित करने के लिए कनाडा सरकार ने आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल किया था।

फ्रीडम ऑफ स्पीच पर किसी की सीख नहीं चाहिए- जयशंकर
भारत और कनाडा के बीच तनाव बढ़ रहा है। इस बीच 30 सितंबर को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने वॉशिंगटन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। उन्होंने कहा- भारत को अभिव्यक्ति की आजादी पर किसी और से सीखने की जरूरत नहीं है। अभिव्यक्ति की आजादी को इस हद तक बढ़ावा नहीं दिया जा सकता कि वो हिंसा भड़काने के लिए इस्तेमाल होने लगे। ये बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

जयशंकर ने कहा- हमारे मिशन्स पर स्मोक बॉम्ब फेंके जाते हैं। डिप्लोमैट्स को धमकाया जाता है और उनके खिलाफ जगह-जगह पोस्टर लगाए जाते हैं। क्या ये आम बात है? अभी ये भारत के खिलाफ हुआ है, अगर ये किसी और देश के खिलाफ किया गया होता, तब भी क्या इस मामले को इतना ही सामान्य समझा जाता? कनाडा में जो कुछ भी हुआ वो कोई छोटी या आम बात नहीं है।

Exit mobile version