ब्रिटेन में बुधवार को 5 लाख से ज्यादा लोगों ने लंदन की सड़कों पर उतर ऋषि सुनक की सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इसे ब्रिटेन का पिछले एक दशक का सबसे बड़ा प्रदर्शन बताया जा रहा है। विरोध करने वाले लोगों में सबसे ज्यादा टीचर्स, सिविल सरवेंट और ट्रेन के ड्राइवर्स रहे, जो अपना काम छोड़कर हड़ताल पर चले गए। इन लोगों ने सरकार से वेतन बढ़ाने और महंगाई को कंट्रोल में करने की मांग की है।
अलजजीरा के मुताबिक हड़ताल करने वालों में 3 लाख के करीब केवल टीचर्स थे, जो पहले कोरोना और फिर यूक्रेन जंग से बढ़ी महंगाई के कारण परेशान हैं। हड़ताल से पहले प्रधानमंत्री ऑफिस ने चेतावनी जारी कर बताया था कि इससे अव्यवस्था फैलेगी। इसके बावजूद लोग नहीं माने और प्रदर्शन में जुटे।
23 हजार स्कूल प्रभावित रहे
नेशनल एजुकेशन यूनियन ने बताया कि टीचर्स की हड़ताल इतनी बड़ी थी कि इसका असर 23 हजार स्कूलों पर रहा। वहीं ब्रिटेन में ट्रेन ड्राइवर्स के काम पर नहीं जाने से वहां ज्यादातर ट्रेनें बंद रहीं। हड़ताल में शामिल एक 33 साल के टीचर निक होन ने बताया कि जिस हिसाब से ब्रिटेन में महंगाई बढ़ी है इससे खर्चा पूरा करने में उनकी सैलरी कम पड़ रही है। 10 घंटे काम करने के बाद भी लोगों को पास्ता खाकर दिन गुजारना पड़ रहा है। इंस्टीट्यूट फॉर फिस्कल स्टडीज के मुताबिक वहां साल 2010 से 2022 के बीच में टीचर्स के वेतन में 9 से 10% की कमी दर्ज की गई है।
अखबारों ने प्रदर्शन को ‘लॉकडाउन 2023’ कहा
ब्रिटेन के कई बड़े अखबारों ने बुधवार को हुई हड़ताल को ‘लॉकडाउन 2023’ तो किसी ने इसे ‘वॉकआउट वेडनेसडे’ नाम दिया। प्रदर्शन की तुलना ब्रिटेन में साल 1978-79 में हुई हड़ताल से की गई, जिसे वहां विंटर ऑफ डिस्कंटेंट यानी सर्दियों के असंतोष के नाम से भी जाना जाता है।
युनिवर्सिटी ऑफ कैमब्रिज की प्रोफेसर कैथरीन बर्नार्ड ने द वॉशिंगटन पोस्ट को बताया कि हड़ताल करने के मामले में ब्रिटेन में काफी सख्त कानून हैं कोई भी इतनी आसानी से इतनी ज्यादा तादाद में सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन नहीं कर सकता है। फिर भी अगर 5 लाख से ज्यादा लोग अपने घरों से निकले हैं तो मामला गंभीर है।
ऋषि सुनक ब्रिटेन की पहली महिला प्रधानमंत्री की राह पर
सोमवार को प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने कहा था, ‘अगर संभव होता तो मैं एक जादू की छ़़ड़ी घुमाकर आपकी परेशानियां दूर कर देता, लेकिन यह नहीं हो सकता है।’
दरअसल सुनक सरकार का मानना है कि अगर टीचर्स और सिविल सर्वेंट्स की सैलरी बढ़ाई गई तो इससे महंगाई बढ़ेगी जो पहले ही ब्रिटेन में आसमान छू रही है।
वेतन न बढ़ाने के फैसले से लोग उनकी तुलना ब्रिटेन की पहली महिला प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर से कर रहे हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ नॉटिंघम में पॉलिटिकल हिस्ट्री के प्रोफेसर स्टीवन फील्डिंग ने कहा कि सुनक मार्गरेट थैचर के रास्ते जा रहे हैं। जो उनके लिए बिल्कुल सही नहीं है। जब वो प्रधानमंत्री बने उस समय उन्होंने दावा किया था कि वो ब्रिटेन की इकोनॉमी को ठीक से संभालेंगे। ठीक इसी तरह के दावे कर मार्गरेट थैचर भी सत्ता में आई थीं। सुनक अब हड़ताल कर रही यूनियन की बात नहीं सुन रहे हैं।
यहां तक कि सरकार वहां हड़ताल करने के खिलाफ नया कानून बनाने की तैयारी कर रही है। थैचर ने भी ऐसा ही किया था। हालांकि इस तरह के फैसले लेने से मार्गरेट थैचर का नुकसान नहीं हुआ था, लेकिन प्रोफेसर स्टीवन के मुताबिक अब समय बदल चुका है। थेचर के समय माहौल उनकी पार्टी के समर्थन में था जो अब नहीं है। साल 2010 से ब्रिटेन में सुनक की कंजरवेटिव पार्टी सत्ता में है। इसके बाद भी हालातों में कोई सुधार नहीं है इसका खामियाजा उन्हें अगले चुनाव में उठाना पड़ सकता है।
एक नजर ब्रिटेन की महंगाई पर
ब्रिटेन के रिटेल कंसोर्टियम ने 31 जनवरी को रिपोर्ट जारी कर बताया कि वहां जनवरी में शॉप प्राइस इन्फ्लेशन 8% दर्ज किया गया, जो साल 2005 से सबसे ज्यादा है। शॉप प्राइस इन्फलेशन दुकान में मिलने वाले रोजमर्रा के सामान में आई कीमतों के उछाल को कहते हैं। ये दिसंबर के महीने में 7.3 % था। ब्लूमबर्ग के मुताबिक ब्रिटेन में खाने के सामान में 13.8 % की बढ़ोतरी हुई है। इससे फल, सब्जियों के दाम तेजी से बढ़े हैं।
इसके अलावा यूक्रेन जंग की वजह से गैस और फ्यूल के दामों में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। BBC के मुताबिक पिछले 2 सालों में बिजली के दामों में बढ़ोतरी होने से पूरे ब्रिटेन के लोगों का बिल में 7 लाख करोड़ रुपए तक बढ़ गया है।
