बांग्लादेश अब से भारतीय दूतावास के काफिले और टॉप डिप्लोमैट्स को एक्स्ट्रा सिक्योरिटी कवर नहीं देगा। इस फैसले की घोषणा बांग्लादेश के विदेश मंत्री डॉक्टर अब्दुल मोमेन ने मंगलवार को की है। मोमेन ने कहा है- हम अपने टैक्सपेयर्स के पैसे को डिप्लोमैट्स को अतिरिक्त सुरक्षा देने के लिए खर्च नहीं कर सकते हैं।
भारत के अलावा अमेरिका, सऊदी और ब्रिटेन के राजदूतों से भी एक्स्ट्रा सिक्योरिटी वापस ली जाएगी। हालांकि, सुरक्षा के सामान्य प्रोटोकॉल का पालन होता रहेगा। ढाका ट्रिब्यून के मुताबिक इस फैसले को लेकर पिछले हफ्ते ही एक लेटर चारों ऐंबैसी को भेजा गया है।
दूसरे देश भी मांगने लगे थे एक्स्ट्रा सिक्योरिटी
बांग्लादेश ने एक्स्ट्रा सिक्योरिटी वापस लेने की वजह बताई है। ढाका पुलिस कमिश्नर के मुताबिक चार देशों के अलावा दूसरी ऐंबैसी भी एक्स्ट्रा कवर की मांग करने लग गई थीं। वहीं, न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक ढाका पुलिस के पास मैनपावर की कमी होने के कारण भी ये फैसला लिया गया है।
बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के मुताबिक अगर कोई ऐंबैसी एक्स्ट्रा कवर चाहती है, तो वो इस तरह की सर्विस को प्राइवेट कंपनियों को पैसे देकर ले सकती है। ढाका में भारतीय दूतावास ने अभी इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं की है। वहीं, जब एक पत्रकार ने मोमेन से सवाल पूछा कि इस फैसले से उन देशों के साथ बांग्लादेश के रिश्ते तो नहीं बिगड़ेंगे, तो इसके जवाब में मोमेन ने कहा- मुझे नहीं लगता है ऐसा कुछ होगा।
2016 के मिलिटेंट अटैक के बाद दी गई थी एक्स्ट्रा सिक्योरिटी
बांग्लादेश ने भारत समेत चारों देशों को ढाका के एक रेस्टोरेंट में 2016 में हुए मिलिटेंट अटैक के बाद एक्स्ट्रा सिक्योरिटी कवर दिया था। इस अटैक में एक भारतीय लड़की समेत 17 विदेशी नागरिकों की मौत हुई थी। एक्स्ट्रा सिक्योरिटी कवर के तहत राजदूतों के काफिले के साथ एक दंगा विरोधी पुलिस दल साथ रहता था, जो अब से नहीं रहेगा।
पिछले हफ्ते ही बांग्लादेश गए थे विदेश मंत्री एस जयशंकर
भारतीय दूतावास के काफिले से एक्स्ट्रा सिक्योरिटी कवर हटाने की घोषणा तब हुई है जब पिछले हफ्ते विदेश मंत्री एस जयशंकर हिंद महासागर पर हुई बैठक में हिस्सा लेने के लिए ढाका गए थे। इस दौरान उन्होंने बांग्लादेश के विदेश मंत्री मोमेन और प्रधानमंत्री शेख हसीना से भी मुलाकात की थी।
