ईरान इस वक्त भीषण सूखे से जूझ रहा है। उसकी परेशानी अफगानिस्तान के साथ लंबे समय से चले आ रहे जल विवाद के कारण बढ़ गई है। ईरान का दावा है कि हेलमंद नदी जल बंटवारे के समझौते पर तालिबान अमल नहीं कर रहा है। इस बारे में मई में ही ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी ने तालिबान को चेतावनी दी थी- या तो अफगानिस्तान समझौते का सम्मान करे या परिणाम भुगतने को तैयार रहे।
इस चेतावनी के एक हफ्ते बाद ईरान और तालिबान के बीच सीमा पर भारी गोलीबारी हुई। इसमें दो ईरानी गार्ड और एक तालिबान लड़ाके की मौत हो गई। इससे दोनों देशों के बीच तनाव गहरा गया है। मामले से जुड़े एक व्यक्ति के अनुसार, तालिबान इस मामले में जरा भी झुकने को तैयार नहीं है। उसने युद्ध की तैयारी कर ली है।
इसके तहत सीमा क्षेत्र में हजारों सैनिक और सैकड़ों आत्मघाती हमलावर भेजे हैं। पहचान उजागर न करने की शर्त पर उन्होंने कहा कि सैनिकों और फिदायीनों के साथ मोर्चे पर अमेरिका द्वारा छोड़े गए वाहन और हथियार भी भेजे गए हैं। थिंक-टैंक मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट के फतेमेह अमान का कहना है कि इन हालात के लिए ईरान खुद दोषी है।
97% ईरानी इलाका सूखे की चपेट में, पलायन बढ़ा
रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरानी सांसदों ने जून में कहा था कि सिस्तान और बलूचिस्तान में स्थिति इतनी गंभीर है कि अगर पानी नहीं मिला तो ‘मानवीय आपदा’ उत्पन्न हो जाएगी। पिछले साल 10,000 से अधिक परिवार प्रांत की राजधानी से भाग गए। एक अनुमान के मुताबिक, बांध सूख रहे हैं और देश का 97% से अधिक हिस्सा सूखे से प्रभावित है। सिंचाई के साधन न होने से करीब 2 करोड़ लोग शहरों में चले गए।
ईरान का दावा- हमें हिस्से का 4% ही पानी मिला
ईरान और अफगानिस्तान के बीच 950 किलोमीटर लंबी सीमा है। दोनों देशों के बीच जल बंटवारे को लेकर 1973 में हेलमंद नदी समझौता हुआ था। पर संधि की न तो पुष्टि की गई और न ही पूरी तरह से अमल में आ पाई। अफगानिस्तान में ईरानी राजदूत हसन कजेमी कूमी कह चुके हैं कि पिछले साल ईरान को अपने हिस्से का सिर्फ 4% पानी ही मिला।
हेलमंद नदी की लंबाई 1150 किमी , इस पर बांध से आपत्ति
हेलमंद नदी का पश्चिमी हिंदुकुश पर्वत शृंखला में काबुल के पास उद्गम है। 1,150 किलोमीटर लंबी यह नदी हामन झील में गिरती है, जो अफगानिस्तान-ईरान सीमा पर फैली हुई है। ये झील ईरान में मीठे पानी की सबसे विशाल झील है। हेलमंद के पानी से भरी यह झील 4,000 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैली हुई है। अफगानिस्तान ने अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए नदी पर कई जगह बांध बना लिए हैं।
