जापान बहुत जल्द अपने खराब हो चुके न्यूक्लियर प्लांट में मौजूद ट्रीटेड रेडियोएक्टिव वॉटर को पैसिफिक ओशन में छोड़ने जा रहा है। इसके लिए उसे UN के न्यूक्लियर वॉचडॉग से अप्रूवल भी मिल गया है। इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के चीफ राफेल ग्रौसी मंगलवार को जापान पहुंचे थे।
यहां उन्होंने प्रधानमंत्री फूमियो किशिदा से मिलकर सेफ्टी रिव्यू किया। IAEA ने कहा कि रेडियोएक्टिव वॉटर को छोड़ने का जापान का प्लान सेफ्टी स्टैंडर्ड्स के अनुसार सही है। हालांकि, जापान में कोस्टल एरिया में रह रहे लोग और चीन समेत कई देश इसका विरोध कर रहे हैं।
2011 की सुनामी से फुकुशिमा न्यूक्लियर प्लांट का कूलिंग सिस्टम हुआ था ठप
पैसिफिक ओशन में 132 करोड़ लीटर पानी छोड़े जाने को लेकर जापान की फिशिंग इंडस्ट्री और सिविल सोसाइटी ग्रुप्स ने भी चिंता जताई है। दरअसल, मार्च 2011 में आई सुनामी की वजह से फुकुशिमा के न्यूक्लियर प्लांट का कूलिंग और इलेक्ट्रिसिटी सिस्टम ठप हो गया था। गर्मी की वजह से वहां मौजूद तीनों रिएक्टर्स के कोर पिघल गए थे, जिसके चलते काफी ज्यादा मात्रा में रेडिएशन फैला था।
पानी छोड़ने के लिए 1 हफ्ते में मिल सकता है परमिट
अल जजीरा के मुताबिक, न्यूक्लियर प्लांट से पानी छोड़े जाने के प्लान की घोषणा 2021 में की गई थी। तब कहा गया था कि ये काम अगले 2 सालों में शुरू हो जाएगा। जापान की रेगुलेटरी बॉडी ने 30 जून को ही अपना इंस्पेक्शन पूरा कर लिया था। UN की जांच के बाद प्लांट की देखभाल कर रही कंपनी TEPCO को एक हफ्ते के अंदर पानी छोड़ने का परमिट मिल सकता है।
इसके बाद वो कभी भी पानी रिलीज करना शुरू कर सकते हैं। हालांकि, इसके लिए कोई तारीख की घोषणा नहीं हुई है। पानी को ओशन में डिस्चार्ज करने में कई दशकों का समय लगेगा। इसे 1 किलोमीटर के पाइप के जरिए छोड़ा जाएगा।
