शीर्ष अदालत ने पिछले आठ वर्षों से जेल में बंद दोषी इरफान को पांच-छह अगस्त, 2014 की मध्यरात्रि को उसके बेटे इस्लामुद्दीन और दो भाइयों इरशाद और नौशाद की मौत में कथित भूमिका के लिए उसकी दोषसिद्धि और मौत की सजा को रद्द करने के बाद तत्काल रिहा करने का भी आदेश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा पाए एक दोषी को बढ़ी राहत देते हुए रिहा कर दिया। साथ ही उसे 2014 में उत्तर प्रदेश के बिजनौर स्थित घर पर अपने बेटे और दो भाइयों को जलाने के आरोप से भी बरी कर दिया, जो कथित तौर पर उसकी दूसरी शादी के खिलाफ थे। शीर्ष अदालत ने कहा कि दो पीड़ितों के मृत्यु पूर्व बयान मुख्य गवाहों की गवाही के साथ मेल नहीं खाते हैं। शीर्ष अदालत ने मृत्युपूर्व बयान पर कानूनी सिद्धांत और इस धारणा की विश्वसनीयता पर भी विस्तार से चर्चा की कि मृत्यु के समय व्यक्ति झूठ नहीं बोलता है।
