समस्याओं के निराकरण के लिए सीएम हेल्पलाइन की सुविधा आम जनता के लिए तो बेहतर है, लेकिन कई विभाग इसमें उलझकर रह गए हैं। ऐसे विभागों की मुसीबत है जिनकी शिकायतों का आधार शासन से न मिलने वाला बजट। ऐसा ही विभाग है अनुसूचित जाति एवं जनजाति कार्य विभाग, जिसके जरिए हजारों विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति मिलती है। छात्रवृत्ति नहीं मिलने से हर महीने विभाग की हजाराें शिकायतें लंबित रहती हैं। विभाग की सहायक आयुक्त विभाग निशा मेहरा तो विद्यार्थियों को समझाती ही रहती हैं कि अगले महीने बजट आ जाएगा तो छात्रवृत्ति मिल जाएगी। कुछ विद्यार्थी मान जाते हैं और सीएम हेल्पलाइन पोर्टल से शिकायत हटा लेते हैं, लेकिन अगले महीने भी छात्रवृत्ति न मिलने पर फिर शिकायत ठोंक देते हैं। विभाग की शिकायतों का ग्राफ कुछ कम होता है और फिर ऊपर चढ़ जाता है। बेचारे अधिकारी करें तो क्या करें?
