साथी आरक्षक पर चाकू से हमले के आरोपी को सजा नहीं दिला पाई पुलिस

By Abhishek Raghuvanshi
3 Min Read

अपने ही साथी आरक्षक पर चाकू से पांच वार करने वाले दो आरोपियों को पुलिस कोर्ट से सजा नहीं दिला पाई। घटना के बाद से लेकर कोर्ट में सुनवाई के दौरान तक उचित प्रक्रिया का पालन नहीं करने सहित आरक्षक का इलाज करने वाले डॉक्टर के बयान में चूक के चलते दो आदतन अपराधियों को सजा नहीं हो सकी। अब इस मामले में अपील करने की तैयारी की जा रही है।

रात को ड्यूटी से घर लौट रहे आरक्षक से पैसे और मोबाइल लूट के दौरान चाकू से हमला करने से जुड़े करीब पांच साल पुराने मामले में अपर सत्र न्यायाधीश प्रेम पाल सिंह ठाकुर ने फैसला सुनाया है। सबूतों के अभाव में आरोपी विक्की झा और दीपक सिकरवार को बरी किया गया है। एडवोकेट अपूर्व अरविंद जैन ने बताया कि घटना 16 जनवरी 2018 की है।
पुलिस सुरक्षा बल के आरक्षक मनोज गोस्वामी तुकोगंज थाना क्षेत्र के पार्क रोड स्टेशन के पास से रात करीब 11.30 बजे गुजर रहे थे, तभी लूट की नीयत से दोनों आरोपियों ने उन्हें रोका। विरोध करने पर मनोज को पेट और पैर में चाकू से पांच वार किए। शोर मचाने पर आरोपी भाग गए। पास ही निजी अस्पताल में मनोज का उपचार किया गया। 1 फरवरी को सिलसिलेवार लूट के आरोप में दोनों को पुलिस ने गिरफ्तार किया गया था।

पुलिस की चूक से बच गए आरोपी
घटना के बाद आरक्षक मनोज के बयान जांच अधिकारी सारिका रावत ने लिए, थाने जाकर एफआईआर भी लिखी, लेकिन उस पर उनके साइन ही नहीं थे। उनकी जगह टीआई के साइन थे, जो कोर्ट में गलत साबित हुए।
जांच अधिकारी ने अस्पताल में बनाई देहाती नालसी (फरियादी के बायन और घटना की जानकारी) में घटना की तारीख, समय आदि का उल्लेख नहीं किया।

आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर स्वतंत्र साक्षी बनाने के बजाए थाने के आरक्षक अजब सिंह को गवाह बना दिया था। उसके बयान में विरोधाभास रहा। सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के इतर साक्ष्य अधिनियम के तहत चालान में पेश किए जाने वाला धारा 65 बी का सर्टिफिकेट नहीं पेश किया गया।

- Advertisement -

मनोज का उपचार करने वाले डॉक्टर अविनाश विश्वानी का बयान, जिसमें उन्होंने कहा ऐसे मामलों से जुड़ी प्रक्रिया की जानकारी मुझे नहीं है। तकनीकी बिंदुओं से जुड़ी क्योरी प्रोसेस पर उन्हें जानकारी नहीं होने की बात सामने आई, जिसका फायदा आरोपियों को मिला।

Exit mobile version