सहकारी संस्था की जमीन के संबंध में शासकीय अधिकारियों पर लोकायुक्त कार्यालय भोपाल द्वारा प्रकरण दर्ज

By Abhishek Raghuvanshi
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इंदौर लोकायुक्त ने कार्यवाही करते हुए 5 लोगो के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है त्रिशला गृह निर्माण सहकारी संस्था के सदस्य द्वारा यह शिकायत की गई थी कि सहकारिता एवं राजस्व विभाग के अधिकारीगण द्वारा दुराशय से त्रिशला गृह निर्माण सहकारी संस्था इंदौर के विरुद्ध थाना खजराना में धोखाधड़ी का प्रकरण इस आधार पर दर्ज करवाया गया था कि उक्त संस्था की ग्राम खजराना में 15 एकड़ आवासीय प्रयोजन की जमीन को न्याय विभाग कर्मचारी गृह निर्माण सहकारी संस्था द्वारा पूर्व में ही खरीदा जा चुका था।प्रकरण दर्ज करवाने के पहले, सहकारी निरीक्षक श्री प्रवीण जैन, जोकि स्वयं ही न्याय विभाग कर्मचारी गृह निर्माण सहकारी संस्था के प्रशासक थे,उपरोक्त आशय की मिथ्या रिपोर्ट तैयार की गई तथा तत्कालीन नायब तहसीलदार द्वारा तत्कालीन अपर कलेक्टर के निर्देश पर थाने में प्रकरण कायम करवाया गया।

जबकि उक्त जमीन को त्रिशला गृह निर्माण संस्था द्वारा रजिस्टर्ड विक्रय पत्र से खरीद कर न्यायालय तहसीलदार से नामांतरण स्वीकृत कराया था,जबकि उक्त जमीन की खरीदी के विरुद्ध अपराध कायम करने सबंधी आवेदन को न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी द्वारा वर्ष 2017 में इस आधार पर खारिज किया गया था कि उक्त विवाद सिविल प्रकृति का है जिस पर अपराध दर्ज नहीं किया जा सकता। लोकायुक्त कार्यालय भोपाल द्वारा संबंधित अधिकारियों से जांच के दौरान उनका पक्ष एवं दस्तावेज प्राप्त कर पाया गया कि वर्ष 1998 में जिस गैर रजिस्टर्ड तथा बिना स्टांप ड्यूटी के इकरारनामा के आधार पर, न्याय विभाग कर्मचारी गृह निर्माण संस्था द्वारा जमीन खरीदी का दावा बताया गया, वह इकरारनामा विधिमान्य नहीं था तथा इस प्रकार का विवाद सिविल प्रकृति का होकर सिविल कोर्ट में चलने योग्य था ना कि अपराध दर्ज करने योग्य। लोकायुक्त कार्यालय भोपाल द्वारा जांच में यह तथ्य भी गलत पाया कि उक्त जमीन शासकीय है तथा यह भी गलत पाया कि पूर्व में उक्त जमीन सीलिंग में आई थी तथा सीलिंग से विमुक्त हुई थी। सहकारिता विभाग एवं राजस्व विभाग के उक्त अधिकारियों को इस जमीन के संबंध में हस्तक्षेप की कोई अधिकारिकता प्राप्त नहीं थी तथा दिनांक 18.10.21 को नायब तहसीलदार का पत्र प्राप्त होते ही,बिना किसी जांच के अपराध कायम करने पर, थाना खजराना के तत्कालीन थाना प्रभारी द्वारा भी माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन करना पाया गया। संपूर्ण जांच के उपरांत, लोकायुक्त कार्यालय भोपाल द्वारा, थाना-विशेष पुलिस स्थापना, भोपाल में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7(ग) के अंतर्गत तत्कालीन सहकारिता निरीक्षक प्रवीण जैन, तत्कालीन अपर कलेक्टर अभय बेडेकर, तत्कालीन नायब तहसीलदार रितेश जोशी, थाना खजराना के तत्कालीन थाना प्रभारी दिनेश वर्मा एवं सउनि एन एस बोरकर के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया गया।

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