शहर के शासकीय अस्पतालों में मरीजों की सुविधाओं के लिए चाहे करोड़ों रुपये खर्च कर दें, लेकिन व्यवस्था में सुधार फिर भी नहीं हो पाता है। डाक्टरों की मरीजों के प्रति रवैया अभी भी सुधर नहीं पा रहा है। मंगलवार को पीसी सेठी अस्पताल में एक गर्भवती महिला अपने पेट से मृत बच्चे का शव आपरेशन कर निकलवाने के लिए पहुंची, लेकिन उसे वहां 13 घंटे तक इंतजार करना पड़ा।
स्वजनों का आरोप है कि अस्पताल में पहुंची महिलाओं को वापस भेजा जा रहा है। मामला कलेक्टर इलैया राजा टी तक पहुंचा। इसके बाद महिला का आपरेशन कर पेट से शव निकाला गया।
बता दें कि गंगराम शर्मा निवासी नंदानगर अपनी पत्नी प्रियंका के साथ 27 मार्च को पीसी सेठी अस्पताल गए थे। डाक्टरों ने सोनोग्राफी करवाने का कहा। जब वह सोनोग्राफी सेंटर पहुंते तो उन्हें मौजूद कर्मचारियों ने 11 अप्रैल को आने के लिए कहा।
मंगलवार को दंपत्ति सोनोग्राफी के लिए पीसी सेठी अस्पताल पहुंचे तो उन्हें पता चला कि पेट में ही शिशु की मौत हो गई है। इसके बाद दंपती रिपोर्ट लेकर डाक्टरों के पास पहुंचे और आपरेशन कर बच्चा बाहर निकालने की गुहार लगाते रहे, लेकिन डाक्टरों ने उन्हें वापस भेज दिया। इसके बाद किसी ने उन्हें कलेक्टर से बात करने की राय दी।
उन्होंने कलेक्टर इलैया राजा को फोन पर सूचना दी। कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अस्पताल प्रबंधन को फटकार लगाई। कलेक्टर का फोन आने के बाद अस्पताल के डाक्टरों ने दंपती को बुलाया और महिला का आपरेशन कर शिशु का शव निकाला और शव पोस्टमार्टम के लिए एमवाय अस्पताल भेजा। फिलहाल इस मामले में जांच बैठा दी गई है।
इस मामले में अस्पताल के प्रभारी डा. निखिल ओझा का कहना है कि दंपत्ति को दोपहर में हमने बच्चे के मृत होने की जानकारी दे दी थी, लेकिन वह डाक्टरों की बात पर विश्वास नहीं कहते हुए यहां से निजी अस्पताल चले गए थे। शाम को गंगाराम शर्मा निजी अस्पताल की रिपोर्ट लेकर वापस अस्पताल आए और गुस्सा होने लगे। रात करीब डेढ़ बजे प्रसूति करवाई गई। बच्चे का पोस्टमार्टम भी करवाया गया है, ताकि पता चल पाएगा कि कितने समय पहले बच्चे की मौत गर्भ में हुई।
