भूमाफिया का पलटवार, अफसरों की धड़कन बढ़ी

By Abhishek Raghuvanshi
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माफिया विरोधी अभियान में वाहवाही लूटने वाले अफसर अब घबराहट में हैं। एफआइआर दर्ज करने वाले अफसरों को लोकायुक्त में नाम-पते लिखवाने पड़ रहे हैं। दुख इस बात का भी है कि कार्रवाई के आदेश देने वाले बड़े अधिकारी चुप हैं। कागजों में नाम-हस्ताक्षर न होने के कारण वे बचे हुए हैं। खजराना थाना में दर्ज एफआइआर के मामले में तो लोकायुक्त ने तत्कालीन अपर कलेक्टर अभय बेड़ेकर व टीआइ दिनेश वर्मा सहित पांच पर पद का दुरुपयोग और भ्रष्टाचार का केस दर्ज कर लिया। माफिया विरोधी अभियान के तहत अफसरों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। कहा था कि सैकड़ों करोड़ का घोटाला उजागर किया है। यह तो एक केस है। तिलकनगर थाने में दर्ज एक अन्य केस में भी लोकायुक्त अब पुलिस अफसरों की घेराबंदी करने में जुटा है। भूमाफिया के विरुद्ध एफआइआर दर्ज करने और गिरफ्तार कर पूछताछ करने वाले पुलिस अधिकारियों को नोटिस थमा दिए गए हैं।

आचार संहिता लगते ही घर रवाना
नई जमावट में पुलिस अफसरों पर नेताओं का ज्यादा असर नजर नहीं आ रहा। डीसीपी से लेकर आयुक्त तक जरूरी हो, उतना ही तवज्जो देते हैं। रसूख का ज्यादा इस्तेमाल करने वालों को मौका देखकर निपटा भी देते हैं। ताजा मामला लसूड़िया थाना के उन चार पुलिसकर्मियों से जुड़ा है, जो भ्रष्टाचार के मामले में घिरे थे। आरोपित पुलिसकर्मियों में एक एएसआइ कद्दावर मंत्री का रिश्तेदार है। मनमर्जी से स्थानांतरण और नौकरी करने वाले इस पुलिसकर्मी के लिए मंत्री ने स्पष्ट आदेश दिए कि उसका नुकसान नहीं होना चाहिए। अफसरों ने मौके का इंतजार किया। जैसे ही आचार संहिता की घोषणा हुई, डीसीपी ने रिपोर्ट भेजकर चारों को नौकरी से हटवा दिया। मंत्री के रिश्तेदार को जांच को चैलेंज देना ज्यादा भारी पड़ गया। आयुक्त ने उसे स्थाई सेवानिवृत्ति दे दी। जिस मामले में कार्रवाई हुई वह पिछले साल अप्रैल का है।

माफिया पर आयुक्त की टेढ़ी नजर
यह पहला अवसर है जब पुलिस के बड़े अफसर आंकड़ों से हटकर जमीनी कार्रवाई में जुटे हैं। इसके पहले मुख्यालय को रिपोर्ट भेजने के लिए अफसर खानापूर्ति में लगे रहते थे। पुलिस आयुक्त मकरंद देऊस्कर का ड्रग्स के मामले में सख्त रवैया है। चिलम-गांजा जब्ती पर रोक लगा दी है। पीने वालों से ज्यादा सप्लाई करने वालों को पकड़ा जा रहा है। लंबे समय से ड्रग सप्लाई करने वाले माफिया की घेराबंदी करवाई गई है। आयुक्त ने पिछले दिनों प्रतापगढ़ (राजस्थान) के कोटड़ी में लाला गैंग पर दबिश दिलवाई, तो राजस्थान में हड़कंप मच गया। जावरा, रलताम और डग के रास्ते मध्य प्रदेश में ड्रग भेजने वाले माफिया घरों से गायब हो गए। वर्षों से ड्रग सप्लाई कर रहे माफिया को संदेश चला गया है कि अब इंदौर में मादक पदार्थों की सप्लाई करना आसान नहीं है। इसके पूर्व पुलिस नशा विरोधी अभियान में चिलम वालों को पकड़ कर खानापूर्ति कर लेती थी।

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