महिलाओं के प्रति बढ़ते अत्याचार का ग्राफ देख पुलिस, कानून और सरकार ने महिलाओं की दयनीय स्थिति पर सख्त कानून बना दिया, इस कानून में पुरुष प्रधान देश को बदल कर महिलाओं के सम्मान, सहिष्णुता, मर्यादा, अत्याचार और अपराध पर लगाम लगाने का काम किया गया, लेकिन यह तो एक पहलू है, इसका दूसरा पहलू भी है वह है.. कि अब इस सख्त कानून का कुछ महिलाएं गलत इस्तेमाल कर रही है, इस कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही है, पुरुषों को डराया और धमकाया जा रहा है, इसका गलत फायदा उठा कर पुरुषों को कानून का डर दिखाया जाता है, कई बार तो गलत करने वाली पत्नी ही पति को सलाखों के पीछे भेज कर शराफत और इंसानियत के मुंह पर तमाचा मार देती है। लेकिन अफसोस इस देख के कानून के ठेकेदरों को फरियादी और अपराधी के बीच के फर्क का अंतर सुनाई देना और दिखाई देना बंद हो गया है। महिला संबंधित अपराधों के बढ़ते ग्राफ को देखते हुए, कानून को सख्त करने की दलील दी जा रहा है, और इसका गलत फायदा उठाने वाले विकृत मानसिकता के धनी बेखौफ आज भी देश में कानूनी व्यवस्थाओं को दरकिनार करते हुए, अपने मंसूबों में कामयाब हो जाते हैं। ऐसी ही घटना एक बार फिर इंदौर के एरोड्रम थाना क्षेत्र में सामने आई है, जहां एक युवक अपनी पत्नी, सास और साले की प्रताड़ना से परेशान होकर आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो गया है।
पुलिस और कानून को तोहमत देने से पहले जरा युवक के द्वारा लिखे उस सुसाइड नोट को पढ़ लिया जाए, जिसे लिखने के बाद उसने आत्महत्या करना ही मुनासिब समझा होगा… क्योंकि इस देश का कानून और पुलिस फिर कभी नहीं समझ पाती की आखिर एक पुरुष भी अपनी पत्नी से प्रताड़ित हो सकता है, क्योंकि इस देश के गांव, कस्बे, जिले और शहरों के थानों के शिकायत रजिस्टर में हर बार केवल महिलाओं पर होते अत्याचार की गवाही देते, कागज के टुकड़े मिलेंगे.. और इसी का डर दिखाकर शायद उस युवक को भी प्रताड़ित किया जा रहा था, तभी उसने लिखा है कि…
मैं रुपेश (ऋषि) गौहर अपनी पत्नी रोहिणी और उसकी मां और उसके भाई से बहुत परेशान होकर आत्महत्या कर रहा हूं, मेरी मृत्यु के जिम्मेदार यह तीनों ही है।
यह लिखकर इंदौर के कलेक्टर ऑफिस में टाइपिस्ट का काम करने वाले युवक रूपेश गौहर निवासी विद्या पैलेस ने आत्महत्या कर ली, घटना की जानकारी के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। एरोड्रम पुलिस के मुताबिक रुपेश ने जहरीला पदार्थ खा लिया था, जिसके कारण उसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उसकी मौत हो चुकी है। मौत का कारण पत्नी से झगड़ा होने की आशंका बताई जा रही है। हालांकि इस बार भी पुलिस ने अब तक पूरी तरह से यह नहीं कहा कि सुसाइड नोट मिला है, या फिर सुसाइड नोट की जांच की जाएगी।
इधर मृतक के परिजनों ने बताया कि 31 मई को युवक ने जहर खाकर आत्महत्या का प्रयास किया था, जिसके बाद उसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया, लेकिन आज सुबह उसकी मौत हो चुकी है। परिजनों ने आरोप लगाया कि मृतक रूपेश का पत्नी से विवाद हुआ था और इस लड़ाई के बाद ही ससुराल पक्ष के लोग उस पर दबाव बना रहे थे, साथ ही मृतक रुपेश पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहा था और वह नहीं चाहता था कि छोटी मोटी लड़ाई उसका जीवन बर्बाद कर दें, किसी प्रकार से उस पर कोई कानूनी कार्यवाही ना हो, और इस डर का फायदा उठाकर पत्नी और उसके परिवार द्वारा युवक को डराया धमकाया जा रहा था.. संभवत इसी के कारण युवक ने आत्महत्या कर ली।
हालांकि इंदौर शहर में इस तरह के पूर्व में भी कई प्रकरण सामने आए हैं, जिसमें कानून का गलत फायदा उठा कर महिलाएं ससुराल पक्ष और पति को प्रताड़ित करने लगती है, हालांकि यह बात भी आंकड़ों को देखकर साफ कही जा सकती है कि शहर में महिला संबंधित अपराधों का ग्राफ बढ़ा है । दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा के कई प्रकरण पुलिस थानों की शिकायत पेटी में दलीलें पेश कर रहे हैं, लेकिन इसमें कितने प्रकरण सच्चे हैं और कितने झूठ है, इस बात की सच्चाई सामने आने में कई वर्ष बीत जाते हैं, फरियादी कब पक्ष कार बन जाता है और न्याय के मंदिर के चक्कर काट काट कर घुटने टेक देता है पता ही नहीं चलता है। कई मामलों में तो सही समय पर सुनवाई हो जाने से प्रकरण खत्म हो जाता है और कई मामलों में पुलिस और कानून के ठेकेदारों के चक्कर काटने वाले अपने आप दम तोड़ कर समझौता कर लेते हैं।
