नर्मदा लाइन के लिए खोदे गड्ढे में डूबने से पांच साल के बच्चे की मौत

By Abhishek Raghuvanshi
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बारिश के कारण लबालब भरा था गड्ढा, बच्चा दोस्तों के साथ खेलने निकला और फिसलकर गड्ढे में गिर गया।
आजाद नगर में पांच वर्षीय वंश पांडे की गड्ढे में डूबने से मौत हो गई। गड्ढा एलएनटी कंपनी ने नर्मदा पाइप लाइन के लिए खोदा था। शुक्रवार को हुई वर्षा से गड्ढे में पानी भर गया था। फिसलन होने से वंश गड्ढे में गिर गया। पुलिस ने मर्ग कायम किया है। पार्षद ने कंपनी के विरुद्ध शिकायत दर्ज करवाई है।

घटना इदरीस नगर में गली नंबर एक की है। वर्षा बंद होने के बाद वंश पुत्र विजय पांडे बच्चों के साथ खेलने निकला था। आने-जाने के दौरान वंश फिसलकर गड्ढे में गिर गया। गड्ढा लबालब भरा हुआ था। करीब 15 मिनट बाद लोगों ने वंश को देखा और स्वजन को खबर कर बाहर निकाला। वंश को डाक्टर के पास ले गए, जिन्होंने वंश को एमवाय अस्पताल ले जाने की सलाह दी। हालांकि, उसकी मौत हो चुकी थी।

कई दिनों से खुदा हुआ है गड्ढा
सूचना मिलते ही वार्ड क्रमांक-54 के पार्षद महेश बसवाल मौके पर पहुंचे। पार्षद ने मजदूर बुलाकर गड्ढा भरना चाहा, लेकिन लोगों ने इसका विरोध किया और कार्रवाई की मांग की। रहवासियों का आरोप था कि गड्ढा कईं दिनों से खुदा हुआ था, लेकिन कई बार चेताने के बावजूद उसे भरा नहीं गया। इदरीश नगर में हुई दुखद घटना पर महापौर ने गहरा दुख प्रकट किया है।

बल्लियां लगाकर छोड़ दिया गड्ढा
इलाके में अमृत योजना (नर्मदा प्रोजेक्ट) के तहत कार्य चल रहा है। इसका ठेका मेसर्स एलएनटी कंपनी के पास है। कंपनी के कर्मचारी व मजदूरों ने दो दिन पहले पाइप लाइन के लिए गड्ढा खोदा था। फ्लशिंग चेक करने के लिए गड्ढा खुला छोड़ दिया। उसके आसपास बैरिकेड न लगाते हुए बल्लियां लगा दीं। मिक्सर मशीन भी उसी जगह छोड़ दी। शनिवार को भी कर्मचारी अधूरा कार्य करने नहीं आए और हादसा हो गया।

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फआइआर दर्ज करने के निर्देश
यह घटना बेहद दुखद है। घटना के दोषी व जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की जाएगी। गड्ढा खोदने के बाद पर्याप्त सुरक्षा के इंतजाम नहीं करने वाली एजेंसी एलएनटी के विरुद्ध एफआइआर दर्ज करने के भी निगम अधिकारियों को निर्देश दिए गए। -पुष्यमित्र भार्गव, महापौर

बारिश ने रोका था काम
गड्ढे की खोदाई दो दिन पहले हुई थी। शनिवार को अधूरा कार्य पूर्ण करना था, लेकिन वर्षा शुरू हो गई। ठेकेदार ने बल्लियां लगा कर रास्ता रोका था। -संजीव श्रीवास्तव, कार्यपालन यंत्री, नर्मदा प्रोजेक्ट

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