इंदौर क्राइम ब्रांच ने जीएसटी (वस्तु एवं सेवाकर) रिफंड घोटाले का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मास्टर माइंड मोहित जैन और उसके साथी मेहरबान को गिरफ्तार किया है। आरोपित महंगा केमिकल निर्यात करना बताकर कस्टम एवं आइजीएसटी विभाग से ड्रा बैक एवं रिफंड हासिल कर लेता था, जबकि पार्सल में केमिकल के स्थान पर चूना भरा होता था।
पुलिस आयुक्त मकरंद देऊस्कर के मुताबिक, सेवनसीज ग्लोबल फ्राइट सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड (वडोदरा) एवं ट्रांसलिंक लाजिस्टिक प्राइवेट लिमिटेड (सूरत) के संचालकों द्वारा शिकायत दर्ज करवाई थी। जहाज मालिकों द्वारा बताया गया कि आकाश केमिकल एवं रुदय केमिकल प्रालि द्वारा केमिकल के ड्रम व पार्सल भेजे गए थे। दुबई व हांगकांग भेजे माल का शुल्क नहीं मिला और संचालक फोन बंद कर लापता है।
जांच के बाद फर्जीवाड़ा उजागर
क्राइम ब्रांच डीसीपी निमिष अग्रवाल से जांच करवाई और गुरुवार को आरोपित मोहित जैन निवासी विद्यानगर और मेहरबानसिंह निवासी शाजापुर को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में पता चला कि मोहित आइजीएसटी विभाग से ड्रा बैक एवं रिफंड लेने के लिए फर्जीवाड़ा कर रहा था। वह विभाग को करोड़ों रुपयों की चपत लगा चुका है।
42 कंपनियों ने खोला राज, आफिस की जगह मिले ठेले
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त राजेश हिंगणकर के मुताबिक, शुरुआत में आकाश केमिकल एवं रुदय केमिकल के विरुद्ध शिकायत मिली थी। कंपनी द्वारा दिए पतों की जांच की तो वहां ठेले खड़े हुए थे। इससे पुलिस का शक गहराया और फोन नंबर, बैंक खातों के आधार पर मोहित जैन को पकड़ा। प्रारंभिक पूछताछ में उसने 42 सैल कंपनियां बनाना स्वीकारा। मोहित ने बताया कि सरकार आयात निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कारोबारियों को आइजीएसटी रिफंड एवं ड्रा बैक देती है। आरोपित जहाज में केमिकल के ड्रम व पार्सल बताकर चूना भेजकर विभाग से करोड़ों रुपये रिफंड प्राप्त कर लेता था। आइजीएसटी और कस्टम विभाग भी उसकी तलाश में जुटा था।
दुबई और हांगकांग में बनाए एजेंट
डीसीपी निमिष अग्रवाल के मुताबिक, मोहित ने फारेन ट्रेड सब्जेक्ट में एमबीए किया है। वह वर्षों से इसी तरह फर्जीवाड़ा कर रहा था। उसने मेहरबान को फर्जी कंपनियां खोलने के लिए रख लिया था। उससे गरीब और मजदूरों के दस्तावेज मंगवाता था। जांच में पता चला कि उसने दुबई और हांगकांग में एजेंट बना लिए थे तो पार्सल पर नजर रखते थे। पार्सल पर मिले कुछ नंबरों की जांच चल रही है।
