फायर ब्रिगेड की तीन गाड़ियों ने आग पर पाया काबू, आग लगने के कारण पुलिस ने टाकीज के आसपास के ट्रैफिक को डायवर्ट कर दिया था।
चार वर्ष पहले नगर निगम ने टाकीज की लीज निरस्त कर इसे कब्जे में ले लिया था।टाकीज को लेकर हाई कोर्ट में प्रथम अपील लंबित है। टाकीज को तोड़ने पर भी रोक है।टाकीज में बिजली कनेक्शन भी नहीं है, इसलिए शार्ट सर्किट से आग नहीं लग सकती।
छोटी ग्वालटोली थाना क्षेत्र स्थित रीगल टाकीज में सोमवार शाम को अचानक आग लग गई, जिससे आसपास हड़कंप मच गया। आग की लपटें दूर तक नजर आ रही थी। सूचना मिलते ही तुरंत मौके पर फायर ब्रिगेड की गाड़ियां पहुंची और आग पर काबू पाना शुरू किया। हालांकि दो घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया। इसमें तीन टैंकर पानी लगा।
बता दें कि रीगल टाकीज कई सालों से बंद पड़ा है, लेकिन इसके बाद भी यहां आग कैसे लग गई है, यह किसी को पता नहीं है। रीगल टाकीज इंदौर के प्रसिद्ध टाकीजों में से एक है, जो पिछले कई सालों से बंद है। आग लगने के कारण शास्त्री ब्रिज से पलासिया की तरफ जाने वाले वाहनों को रोक दिया गया था। उन्हें ग्वालटोली से मधुमिलन की तरफ डायवर्ट किया गया। वहीं कुछ ट्रैफिक को एमटीएच कंपाउंड की तरफ मोड़ा गया था।
चार वर्ष से निगम के कब्जे में
करीब चार वर्ष पहले नगर निगम ने रीगल टाकीज की लीज निरस्त करते हुए इसे कब्जे में ले लिया था। इसके बाद से यहां निगम के ताले लगे हैं। टाकीज को लेकर हाई कोर्ट में प्रथम अपील लंबित है। टाकीज की इमारत तोड़ने पर कोर्ट की रोक है। सोमवार को अग्निकांड की घटना के बाद किसी समय रीगल टाकीज संचालित करने वाले दीपक ठाकुरिया ने निगमायुक्त को पत्र भी लिखा है।
बिजली कनेक्शन नहीं तो शार्ट सर्किट कैसे
ठाकुरिया ने पत्र में कहा है कि मामले में षड्यंत्र की बू आ रही है। जब रीगल टाकीज में बिजली कनेक्शन है ही नहीं तो शार्ट सर्किट कैसे हो सकता है। फायर स्टेशन कुछ ही कदम दूर होने के बावजूद दमकल पहुंचने में देरी हुई। टाकीज के अंदर फर्नीचर और मशीनें थीं। लाखों रुपये नकदी भी थी। ठाकुरिया ने आगजनी की घटना की मांग की है। पत्र में कहा है कि लापरवाही को लेकर पूर्व में भी पत्र लिखा जा चुका है। सोमवार को भी रीगल टाकीज में कोई चौकीदार नहीं था।
निगम ने लीज की निरस्त
रीगल टाकीज को 99 वर्ष की लीज पर ठाकुरिया परिवार को दिया गया था। बाद में नगर निगम ने इसकी लीज निरस्त कर दी। मामला न्यायालय पहुंचा। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद वर्ष 2019 में निगम ने लीज निरस्त करते हुए रीगल टाकीज को अपने कब्जे में ले लिया।
