इंदौर कलेक्टोरेट के बाबू का पौने चार करोड़ का घपला सामने आया, गोवा की हवाई यात्राएं कीं

By Abhishek Raghuvanshi
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सरकारी धन पर अय्याशी : डेढ़ करोड़ का फार्म हाउस खरीदा, मुंबई-गोवा की हवाई यात्राएं। शासन की वित्तीय प्रबंधन व्यवस्था में कलेक्टर कार्यालय के एक बाबू ने ऐसी सेंधमारी कि पूरा प्रशासन हतप्रभ है। कलेक्टोरेट की लेखा शाखा के बाबू मिलाप चौहान ने शासकीय योजनाओं के हितग्राहियों और राहत राशि के आनलाइन फेल हो चुके ट्रांजेक्शन का उपयोग कर अपने और दोस्तों के बैंक खातों में करोड़ों की राशि ट्रांसफर कर ली। उसने पत्नी, साले और कलेक्टर कार्यालय के कुछ अन्य कर्मचारियों के खातों में भी अवैध तरीके से सरकारी धन ट्रांसफर किया। बाद में यह पैसा निकाल लिया। यह घपला वह चार साल से कर रहा था और अब जाकर पकड़ में आया है। जिला प्रशासन की अब तक की जांच में पौने चार करोड़ रुपये का घोटाला सामने आ चुका है। सरकारी धन की हेराफेरी कर वह इसे अय्याशी में खर्च करता रहा।

पत्नी, साले, दोस्तों और अन्य शासकीय कर्मचारियों के बैंक खातों में भी डालता रहा पैसा
इस पैसे से महू में डेढ़ करोड़ रुपये का फार्म हाउस खरीद लिया और वहां स्विमिंग पूल का निर्माण किया जा रहा है। मुंबई और गोवा की कई हवाई यात्राएं की और वहां बार बालाओं और काल गर्ल पर लाखों रुपये खर्च किए। केसिनो में भी सरकारी धन उड़ाया। यही नहीं दोस्तों, रिश्तेदारों को भी हवाई जहाज से मुंबई और गोवा ले जाकर अय्याशी की। कलेक्टर इलैया राजा टी ने मामले की जांच के लिए अपर कलेक्टर राजेश राठौर के नेतृत्व में समिति बनाई है। मामले की जांच तीन दिन से चल रही है। बुधवार को भी अपर कलेक्टर राठौर ने घोटालेबाज मिलाप को पूछताछ के लिए कलेक्टर कार्यालय बुलाया। उसने जिन दोस्तों और कर्मचारियों के खाते में पैसे डाले थे, उनको भी पूछताछ के लिए बुलाया गया।

जिसके खाते में पैसा जमा करता… उसे भी कुछ हिस्सा देता था
सरकारी बाबू मिलाप ने अपनी पत्नी मनीषाबाई के नाम का तो उपयोग किया ही, कलेक्टर कार्यालय के कुछ अन्य कर्मचारियों के बैंक खातों का भी उपयोग किया। कर्मचारियों और दोस्तों के खाते में पैसा डालकर बाद में उनसे ले लेता था। इसके बदले वह उनको कुछ रुपये दे देता था। हेराफेरी करके निकाले गए सरकारी धन से उसने अपने और दोस्तों के बैंक लोन भी चुकाए।

कोषालय कर्मचारियों की मिलीभगत की भी आशंका
इस वित्तीय घोटाले में जिला कोषालय के कर्मचारियों के मिले होने की भी आशंका है। बताया जाता है कि कोषालय का एक बाबू भी मिलाप के संपर्क में रहता था। माना जा रहा है कि किसी तकनीकी कमी के कारण फेल हो चुके आनलाइन ट्रांजेक्शन से बाद में पैसा निकालने और बिल पास करने में कलेक्टर कार्यालय के बाबू मिलाप की वह मदद करता था। जांच समिति इस दिशा में भी जांच कर रही है।

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अपनी तरह का पहला मामला….दो हजार से अधिक ट्रांजेक्शन जांच के दायरे में
किसी कलेक्टर कार्यालय और जिला कोषालय के बीच शासकीय राशि के लेनदेन में गबन का यह अपनी तरह का पहला मामला है। इस मामले ने आनलाइन ट्रांजेक्शन की व्यवस्था की पोलपट्टी को भी उजागर करके रख दिया है। कलेक्टर कार्यालय की लेखा शाखा से बीते चार साल में करीब दो हजार ट्रांजेक्शन ऐसे रहे जो फेल हुए हैं। इन सभी को जांच के दायरे में लिया गया है। एक-एक ट्रांजेक्शन की जांच की जा रही है। इसमें प्रशासन और जिला कोषालय के अधिकारी भी लगे हैं।
लेखा शाखा के बाबू द्वारा की गई शासकीय धन की हेराफेरी की जांच की जा रही है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, गबन की राशि बढ़ती जा रही है। जांच समिति रात-दिन जांच कर रही है। जल्द ही रिपोर्ट तैयार हो जाएगी। इस मामले में जो-जो भी लिप्त पाए जाएंगे उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। – इलैया राजा टी, कलेक्टर

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