- महू आर्मी वार कालेज में भी तेंदुए की दहशत, दोनों जगह वन विभाग का सर्च आपरेशन जारी। वन विभाग ने लोगों को किया सचेत।
- सीसीटीवी कैमरे में कैद आइआइटी इंदौर परिसर में घूमता तेंदुआ। वहीं महू आर्मी वार कालेज परिसर में वन विभाग ने तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया।
- आइआइटी इंदौर परिसर में रहने वाले शिक्षक-विद्यार्थी और कर्मचारियों में दहशत। वन विभाग ने शुरू की सर्चिंग।
- महू स्थित आर्मी वार कालेज में भी तेंदुए का मूवमेंट देखा गया है। तेंदुए को पकड़ने वहां पिंजरे में बकरी को बांधा है।
- जंगल से जानवरों के बाहर आने की सबसे बड़ी वजह इंदौर-खंडवा-एदलाबाद राजमार्ग का निर्माण होना है।
इंदौर। सिमरोल स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) इंदौर में मादा तेंदुए सहित दो शावकों को देखा गया। इसके बाद परिसर में रहने वाले शिक्षक और विद्यार्थी सहित कर्मचारी डरे हुए हैं। सूचना मिलने पर वन विभाग ने परिसर में तेंदुए की तलाश शुरू कर दी है। दिनभर में दो मर्तबा वनकर्मी सर्च आपरेशन चलाने में लगे हैं। तेंदुए और शावकों को पकड़ने के लिए अलग-अलग स्थानों पर पिंजरे लगाए हैं।वहीं, महू स्थित आर्मी वार कालेज में भी तेंदुए का मूवमेंट देखा गया है। रेस्क्यू टीम ने तेंदुए को पिंजरे में कैद करने के लिए बकरी को बांधा है। अधिकारियों के मुताबिक, जंगल से जानवरों के बाहर आने की सबसे बड़ी वजह इंदौर-खंडवा-एदलाबाद राजमार्ग का निर्माण होना है, क्योंकि वन्यप्राणियों का क्षेत्र प्रभावित हुआ है। इसके चलते महू-चोरल और बड़वाह में वनप्राणियों का मूवमेंट बढ़ा है।
तेंदुए और शावकों के पगमार्क मिले
आइआइटी इंदौर परिसर में घूम रहे तेंदुए और दोनों शावक सीसीटीवी में कैद हुए हैं। प्रबंधन ने वन विभाग को जानकारी दी। फिर चोरल रेंज ने सर्च आपरेशन चलाया। सुबह और शाम वनकर्मी परिसर में घूमकर तेंदुए की तलाश में जुटे हैं। कई स्थानों से तेंदुए के पंजों के निशान मिले हैं। उसके आधार पर पांच से छह साल की मादा तेंदुआ बताई जा रही है, जबकि शावकों को पगमार्क काफी छोटे हैं।
परिसर में तीन-चार दिन से घूम रहे
वनकर्मियों के मुताबिक, झाड़ियां अधिक होने की वजह से तेंदुए को ढूंढने में थोड़ी परेशानी हो रही है। चोरल रेंजर सचिन वर्मा का कहना है कि तेंदुए के मूवमेंट के बारे में पता लगाया जा रहा है। वैसे परिसर में पिंजरे लगाए गए हैं। पिछले तीन-चार दिन से मादा तेंदुआ और शावक परिसर में घूम रहे हैं।
आर्मी वार कालेज परिसर में बाघ के बाद अब तेंदुआ
बाघ के बाद आर्मी वार कालेज और सैन्य परिसर में तेंदुए की हलचल है। इससे वहां रहने वाले लोगों में दहशत है। अप्रैल से अक्टूबर के बीच बाघ और तेंदुआ कई बार दिख चुका है। वैसे इन दिनों बाघ बड़गोंदा वनक्षेत्र में घूम रहा है। आर्मी वार कालेज व मिलेट्री कालेज में तेंदुआ सितंबर से दिख रहा है। आर्मी वार कालेज में तेंदुए को पकड़ने के लिए रेस्क्यू टीम लगी है। रेस्क्यू टीम रेंजर योगेश यादव का कहना है कि मंगलवार को परिसर में टीम ने दो पिंजरों में बकरियां रखी हैं।
रात में किया सुरंग का काम 216 किमी लंबे इंदौर-खंडवा-एदलाबाद राजमार्ग का निर्माण कई महीनों से चल रहा है। अगस्त में एनएचएआइ ने वन विभाग से रात में काम करने की अनुमति मांगी। इंदौर वनमंडल से तत्कालीन डीएफओ नरेंद्र पंडवा ने मुख्यालय को पत्र भेजा, जिसमें चोरल को वनप्राणियों की दृष्टि से संवेदनशील नहीं माना। इसके आधार पर एपीसीसीएफ एचएस मोहंता ने अनुमति दी। पहले विभाग ने पत्र में सड़क और सुरंग दोनों का काम रात में करने का उल्लेख किया। आपत्ति लेने के बाद विभाग ने 12 सितंबर को नया आदेश दिया और सिर्फ सुरंग का निर्माण रात में करने की अनुमति दी। यह आदेश सिर्फ एक महीने के लिए दिया गया था, जो अक्टूबर में खत्म हो चुका है। नियमानुसार सूर्यास्त के बाद जंगल में निर्माण कार्य प्रतिबंधित है।
इंदौर वनमंडल में 70 से अधिक तेंदुए
इंदौर वनमंडल में तेंदुए की संख्या बीते पांच साल में बढ़ गई है। 2017-2018 के बीच इंदौर, चोरल, महू और मानपुर में इनकी संख्या 45 थी, जो अब 70 पार पहुंच चुकी है। अकेले महू में 22 तेंदुए हो चुके हैं।
