अव्यवस्था से त्रस्त होकर माता-पिता बन गए नर्स, एक ने बच्चे को लिया, दूसरे ने खींचा सिलिंडर

By Abhishek Raghuvanshi
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अस्पताल में हाल-बेहाल, कोई नहीं देता ध्यान, 10 दिन से अस्पताल में भर्ती है बच्चा, किसी ने सहयोग तक नहीं किया।
आठ माह का मासूम बच्चा निमोनिया के इलाज के लिए दस दिनों से इंदौर के एमवाय अस्पताल के पीआइसीयू वार्ड में भर्ती है। बच्चे की देखभाल के लिए उसके माता-पिता सुबह से शाम तक वार्ड के बाहर ही बैठे रहते हैं। शुक्रवार को बच्चे को एक्स-रे के लिए लेकर जाना था, लेकिन बच्चे को वहां तक ले जाने के लिए कोई भी कर्मचारी सामने नहीं आया, जबकि यहां मरीजों को स्ट्रैचर से लेकर जाने के लिए कर्मचारी तैनात है। थोड़ी देर तक माता-पिता ने राह देखी, लेकिन जब कोई नहीं आया तो वे खुद ही आगे आए। मां ने बच्चे को गोद में लिया और पिता आक्सीजन का सिलिंडर धकाते हुए उनके साथ चलते रहे।
एमवाय अस्पताल में कार्यरत कर्मचारी भी यह नजारा देखते रहे, लेकिन किसी ने सहयोग करना उचित नहीं समझा। क्योंकि उनके लिए यह आम बात हैं। जोजलवाड़ी (खरगोन) से आए पिता जगदीश ने बताया कि वे मजदूरी करते हैं। बच्चे को निमोनिया हो गया है। यहां खुद को सभी काम करना पड़ता है।

कर्मचारी से कहा तो बोला- अभी इंतजार करो
जगदीश ने बताया कि सिलिंडर उठाने के लिए कर्मचारियों से कहा गया तो वे थोड़ा इंतजार करने को कहते रहे। इसके बाद किसी ने मुझसे कहा कि आप ही लेकर चले जाएं कोई नहीं सुनेगा। इस पर खुद ही अपनी पत्नी के साथ लेकर गया। बच्चा जल्दी से स्वस्थ हो जाए, बस यहीं चाहते हैं। जिम्मेदारों ने कहा कि यदि कुछ ऐसा है, तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

एक्स-रे करवाने के लिए करना पड़ता है लंबा इंतजार
महूनाका क्षेत्र से गोविंद अपना एक्स-रे करवाने के लिए एमवाय अस्पताल में आए, लेकिन उन्हें भी यहां काफी देर तक इंतजार करवाया गया। गोविंद ने बताया कि वे पेट दर्द होने पर एक्स-रे करवाने के लिए यहां आए थे। करीब 30 मिनट बाहर इंतजार करवाने के बाद उन्हें अंदर लेकर गए। अंदर मौजूद स्टाफ ने उन्हें लेटा दिया और वे गपशप करने में व्यस्त रहे। करीब 15 मिनट तक ऐसा ही चलता रहा।

ये आम दृश्य एमवाय अस्पताल में
एमवाय अस्पताल में मरीजों के स्वजन को स्ट्रेचर धकाते देखना आम बात है। यही नहीं, बुजुर्ग व बच्चों को भी स्ट्रेचर धकाते देखा जा सकता है। मध्यभारत के सबसे बड़े शासकीय अस्पताल में मरीजों को इस तरह की सुविधाएं मिल रही हैं, जबकि यहां सुविधाएं देने के नाम पर जिम्मेदार बड़े-बड़े वादे करते हुए नजर आते हैं।

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