साढ़े तीन गुना भुगतान वसूल रहा इंदौर नगर निगम, फिर भी नहीं मिल रही सुविधा

By Abhishek Raghuvanshi
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27 अप्रैल को प्रस्तुत नगर निगम के वित्तीय वर्ष 2023-24 के बजट को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दायर हुई है। इसमें कहा गया है कि इंदौर नगर निगम शहरी विकास मंत्रालय द्वारा निर्धारित शुल्क से लगभग साढ़े तीन गुना अधिक शुल्क वसूल रहा है। बावजूद इसके नागरिकों को सुविधाएं नहीं मिल रहीं। याचिका में कहा गया है कि स्मार्ट सिटी और एआइसीटीएसएल नगर निगम के अंतर्गत हैं, लेकिन इनका कोई लेखा-जोखा निगम के बजट में नहीं है। इसमें मांग की गई है कि याचिका के अंतिम निराकरण तक नए करों की वसूली पर रोक लगाई जाए और स्मार्ट सिटी और एआइसीटीएसएल के लेखा-जोखा न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करवाया जाए।

यह जनहित याचिका सामाजिक कार्यकर्ता किशोर कोडवानी ने दायर की है। कहा है कि शहरी विकास मंत्रालय द्वारा नगर निगम के दायित्वों में पानी, सड़क, सफाई, सीवरेज, वर्षा जल निकासी, स्ट्रीट लाइट, यातायात, लोक परिवहन शामिल हैं। इन आठ सेवाओं के बदले प्रति व्यक्ति 1806 रुपये के बदले 6299 रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इंदौर के नागरिक 1806 के स्थान पर निगम को 6513 रुपये इन सेवाओं के बदले में दे रहे हैं। बावजूद इसके पर्याप्त सेवाएं नहीं मिल रही हैं।
नगर निगम सीमा की 35 लाख जनसंख्या के हिसाब से 632.10 करोड़ रुपये खर्च होना चाहिए थे लेकिन वर्ष 2022-23 के बजट अनुसार 2204 करोड़ रुपये की वसूली हुई है। यह मानक से करीब साढ़े तीन गुना है। जनहित याचिका में मांग की गई है कि याचिका का निराकरण होने तक नए करारोपण पर रोक लगाई जाए। निजी टाउनशिप/डेवलपरों द्वारा निगम दायित्व के बदले की जा रही अवैध वसूली पर रोक लगाई जाए और अवैध रूप से वसूली गई रकम लोगों को लौटाई जाए। कलेक्टर गाइडलाइन आधारित कर व्यवस्था लागू की जाए। स्मार्ट सिटी और एआइसीटीएसएल के लेखा जोखा निगम परिषद में प्रस्तुत करने का आदेश दिया जाए।

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