सभी अवैध कब्जों को हटाएंगे, बोले इंदौर कलेक्टर इलैया राजा

By Abhishek Raghuvanshi
4 Min Read


स्विमिंग पूल, आलीशान बगीचा सहित ऐशो-आराम के सारे साधन। स्टार चौराहा व बायपास रोड के बीच है सीलिंग की जमीन।
शहर के खजराना क्षेत्र में भूमाफिया इस्लाम पटेल का फार्म हाउस शनिवार को प्रशासन, नगर निगम और पुलिस के संयुक्त दल ने ढहा दिया। स्टार चौराहा और बायपास रोड के बीच सीलिंग की जमीन पर यह फार्म हाउस बिना अनुमति बनाया गया था। इसमें स्विमिंग पूल, आलीशान बगीचा सहित ऐशो-आराम के सारे साधन थे। फार्म हाउस करीब 24 हजार वर्गफीट में बना था और इस जमीन का बाजार मू्ल्य करीब 30 करोड़ रुपये है।
अवैध निर्माण को लेकर नगर निगम ने पहले ही इस्लाम को नोटिस जारी किया था। शनिवार को एसडीएम अंशुल खरे, निगम उपायुक्त लता अग्रवाल सहित अन्य अधिकारी बड़ी संख्या में पुलिस बल लेकर भू-माफिया के फार्म हाउस पहुंचे। अमले ने मशीनों से फार्म हाउस का पक्का निर्माण तोड़ा और परिसर के अन्य निर्माण भी तोड़ डाले। प्रशासन को आशंका थी कि कार्रवाई के विरोध में भू-माफिया की तरफ से कोई आएगा, लेकिन वहां कोई नहीं पहुंचा।
सभी अवैध कब्जे हटाएंगे
इस्लाम पटेल और शासन के बीच सीलिंग भूमि का मामला तो कोर्ट में चल रहा है, लेकिन उसके फार्म हाउस पर कार्रवाई अवैध निर्माण को लेकर की गई है। शहर में ऐसी सभी शासकीय या सीलिंग भूमि से अवैध कब्जे हटाएंगे जो किसी माफिया के कब्जे में है। इस तरह की कार्रवाई कुछ समय पहले छोटा बांगड़दा में भी हो चुकी है।
– इलैया राजा टी, कलेक्टर
करोड़ रुपये की कीमत वाली सीलिंग की जमीन पर किया था अवैध निर्माण
धोखाधड़ी, जालसाजी समेत कई मामलों में दर्ज हैं केस एसडीएम खरे के अनुसार, इस्लाम पर धोखाधड़ी, जालसाजी व शासकीय दस्तावेजों में हेराफेरी के आधा दर्जन केस दर्ज हैं। ईओडब्ल्यू में भी उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज हैं। उसके खिलाफ जिला बदर का मामला भी चल रहा है।
इस्लाम ने नोटरी पर बेचे सरकारी जमीन के प्लाट
भू-माफिया इस्लाम पटेल लंबे समय से प्रशासन के निशाने पर था। उसके खिलाफ कई शिकायतें हैं कि वह दस्तावेजों में हेराफेरी कर नोटरी के आधार पर शासकीय जमीन पर प्लाट बेच देता है। सस्ता प्लाट चाहने वाले लोग झांसे में आ जाते थे। खजराना में सीलिंग की जमीन पर पटेल नगर कालोनी बसा दी। यहां नोटरी पर प्लाट बेचे हैं
सीलिंग की 1200 एकड़ जमीन पर बन गईं अवैध कालोनियां!
सरकारी दस्तावेजों में सीलिंग की 1200 एकड़ जमीन है, लेकिन धरातल पर हकीकत अलग है। शहर में सीलिंग की अतिशेष भूमि शासन ने ले ली थी, लेकिन आज अधिकांश भूमि पर अवैध कालोनियां कट गई हैं। मप्र सरकार ने वर्ष 2000 में सीलिंग एक्ट खत्म कर दिया था। उस वक्त तक जितनी भूमि इस एक्ट से प्रभावित हुई थी, वह तो शासन के पास ही होना चाहिए थी, किंतु अधिकांश जमीन शासन के पास नहीं है। इसमें भूमि स्वामियों और शासन के बीच कानूनी विवाद भी अलग-अलग कोर्ट में चल रहे हैं।

Exit mobile version