शिक्षा उपकर के रूप में करोड़ों रुपये जमा, कब सुधरेंगे विद्यालयों के हालात

By Abhishek Raghuvanshi
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प्रदेशभर में शासकीय विद्यालयों की बदहाली को लेकर उच्च न्यायालय में दायर जनहित याचिका में मई के पहले सप्ताह में अंतिम बहस होगी। याचिका में कहा गया है कि शासन करोड़ों रुपये शिक्षा उपकर के रूप में नागरिकों से जमा करवाता है। बावजूद इसके शासकीय विद्यालय बदहाल हैं। वहां बिजली, पीने का पानी, बैठने के लिए फर्नीचर और मौसम के कहर से बचने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। शासन इन आरोपों को खारिज करते हुए कह चुका है कि शासकीय विद्यालयों की व्यवस्था लगातार सुधर रही है। इनमें बिजली, पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध रहती हैं।

उच्च न्यायालय में यह जनहित याचिका इंदौर निवासी महादेव चौबे ने अभिभाषक मनीष विजयवर्गीय के माध्यम से दायर की थी। याचिका लंबित रहने के दौरान ही याचिकाकर्ता का निधन हो गया। वर्तमान में मूल याचिकाकर्ता के पुत्र गौरव याचिकाकर्ता हैं। याचिका में कहा है कि नगर पालिका और नगर निगम प्रतिवर्ष संपत्ति कर के साथ शिक्षा उपकर के रूप में करोड़ों रुपये वसूलते हैं।

सरकारी स्कूलों की हालत बदहाल
सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के अनुसार अकेले इंदौर नगर निगम ने वर्ष 2017-18 में शिक्षा उपकर के रूप में नागरिकों से 31 करोड़ 76 लाख रुपये वसूले थे। इसी तरह 2018-19 में यह रकम 28 करोड़ 50 लाख रुपये से ज्यादा थी। इस रकम से नगर निगम को शासकीय विद्यालयों की हालात सुधारनी थी। वहां बिजली-पानी और फर्नीचर का प्रबंध करने के साथ-साथ शिक्षकों की व्यवस्था भी करनी थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इंदौर नगर निगम ने 2018-19 में वसूली गई 28 करोड़ 50 लाख रुपये की राशि में से सिर्फ 7 करोड़ 92 लाख रुपये स्कूलों पर खर्च किए। यह रकम भी सिर्फ निर्माण पर खर्च की गई।

अब मई में होगी बहस
पूरे प्रदेश में नगरीय निकाय उपकर के रूप में नागरिकों से वसूली कर रहे हैं, लेकिन इस रकम का इस्तेमाल कहां हो रहा है, यह किसी को पता नहीं होता। याचिका में प्रमुख सचिव नगरीय प्रशासन विभाग, प्रमुख सचिव शिक्षा विभाग, इंदौर कलेक्टर, निगमायुक्त और जिला शिक्षा अधिकारी पक्षकार हैं। शासन अपने उत्तर में स्कूलों की बदहाली से इन्कार कर चुका है। याचिका में अंतिम बहस मई के पहले सप्ताह में होगी।

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