- लंबी मशक्कत और कई दौर की मंत्रणाओं के बाद सोमवार को मध्य प्रदेश सरकार का बहुप्रतिक्षित मंत्रिमंडल का विस्तार हो गया।
- सत्ता का गलियारा कहा जाने वाला मालवा-निमाड़ क्षेत्र मोहन सरकार में भी मजबूत ही है।
- मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री के अलावा सात मंत्री भी इसी क्षेत्र से हैं।
इंदौर। लंबी मशक्कत और कई दौर की मंत्रणाओं के बाद सोमवार को मध्य प्रदेश सरकार का बहुप्रतिक्षित मंत्रिमंडल का विस्तार हो गया। सत्ता का गलियारा कहा जाने वाला मालवा-निमाड़ क्षेत्र मोहन सरकार में भी मजबूत ही है। मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री के अलावा सात मंत्री भी इसी क्षेत्र से हैं। क्षेत्र, अनुभव, जातिगत समीकरण और नए चेहरों को मंत्रिमंडल में स्थान मिला है। हालांकि बीती सरकार में शामिल रहे क्षेत्र के कई वरिष्ठ विधायक इस बार मंत्रिमंडल में जगह नहीं पा सके तो भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश जयवर्गीय भी बतौर केबिनेट मंत्री सरकार में शामिल हुए हैं।
विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत मिलने के बाद भाजपा ने उज्जैन के विधायक डा. मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाकर सभी को चौंकाया था। इसके बाद इस बात के कयास राजनीतिक गलियारों में लगाए जा रहे थे कि मंत्रीमंडल में भी इसी तरह चौंकाने वाले नाम नजर आएंगे। तब से लेकर केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व के साथ कई दौर की चर्चाओं के बाद प्रदेश सरकार की ’नई सूरत‘ सामने आई है।
66 विधानसभा सीटों वाले मालवा-निमाड़ क्षेत्र से इस बार सात कैबिनेट और राज्य मंत्रियों को स्थान मिला है। जबकि मंदसौर की मल्हारगढ़ विधानसभा सीट से वरिष्ठ विधायक जगदीश देवड़ा को पहले ही बतौर उपमुख्यमंत्री सरकार में शामिल किया जा चुका है।
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और इंदौर के क्षेत्र क्रमांक एक से विधायक कैलाश विजयवर्गीय भी नई सरकार में बतौर मंत्री शामिल हो गए हैं।
मुख्यमंत्री पद के दावेदार रहे विजयवर्गीय को मंत्री बनाकर संगठन ने यह संदेश भी दिया है कि भाजपा में संगठन का निर्णय ही सर्वमान्य होता है। इसके अलावा 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ भाजपा में शामिल हुए तुलसी सिलावट भी मंत्री बने हैं। आदिवासी क्षेत्र को प्रतिनिधित्व देते हुए निमाड़ के हरसूद क्षेत्र से आठ बार के विधायक विजय शाह, पांचवी बार झाबुआ जिले के पेटलावद से विधायक बनी निर्मला भूरिया और चौथी बार आलीराजपुर जिले से विधायक बने नागरसिंह चौहान को मंत्रिमंडल में स्थान मिला है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता रहे स्व. दिलीपसिंह भूरिया की पुत्री निर्मला दूसरी बार मंत्री बन रही हैं। इसके पूर्व वे वर्ष 2008 में भी शिवराज सरकार में मंत्री रह चुकी हैं, जबकि नागरसिंह पहली बार मंत्री बन रहे हैं। क्षेत्र की 22 आदिवासी मतदाता बहुल सीटों से तीन विधायकों को मंत्रिमंडल में स्थान दिया गया है। इसके अलावा रतलाम के विधायक चैतन्य काश्यप और शुजालपुर से विधायक इंदरसिंह परमार को भी मोहन सरकार में मंत्री बनाया गया है। काश्यप पहली बार मंत्री बने हैं जबकि परमार शिवराज सरकार में भी स्कूली शिक्षा मंत्री रह चुके हैं।
क्षेत्र, वरिष्ठता,जातिगत संतुलन को साधने की कोशिश
कई वरिष्ठ विधायक इस बार नहीं पा सके जगह मोहन मंत्रिमंडल में मालवा-निमाड़ क्षेत्र को पिछली सरकार की तुलना में भले ही एक मंत्री पद कम मिला है, लेकिन सरकार में मालवा-निमाड़ क्षेत्र विंध्य, महाकौशल और मध्य क्षेत्र की तुलना में मजबूत है। मुख्यमंत्री मोहन यादव, उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और केबिनेट मंत्री व भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विजयवर्गीय भी इंदौर से हैं।
पिछली सरकार में मंत्री रहे ऊषा ठाकुर, ओमप्रकाश सखलेचा,हरदीपसिंह डंग को नए मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल सकी है। मंत्रिमंडल में मालवा-निमाड़ क्षेत्र से नए चेहरों के साथ ही अनुभवी विधायकों को शामिल कर संगठन ने संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया है।
