वक्त पर शिकायत करने पर क्राइम ब्रांच ने ठगों के खातों के ट्रांजेक्शन पर रोक लगाकर पीड़ितों को वापस दिलवाई राशि।
इंदौर क्राइम ब्रांच ने ठगी के शिकार 17 लोगों को राहत दिलाई है। फर्जी बैंक अफसर, कस्टमर केयर और ई-वालेट अफसरों के शिकार बने उपभोक्ताओं के सवा आठ लाख रुपये लौटाए हैं। इन पीड़ितों ने साइबर सेल की हेल्प लाइन 7049124445 पर कॉल कर शिकायत दर्ज करवाई थी।
डीसीपी (अपराध) निमिष अग्रवाल के मुताबिक, ज्यादातर ठगी उन लोगों के साथ हुई जो गूगल पर कस्टमर केयर, हेल्प डेस्क या नौकरी की तलाश में थे। लोगों से ठगोरों ने संपर्क साधा और एनी डेस्क, क्विक सपोर्ट जैसे एप के माध्यम से मोबाइल हैक कर लिया या ई-वालेट के माध्यम से रुपये जमा करवाकर 17 लोगों से कुल आठ लाख 14 हजार रुपये ठग लिए। पुलिस ने शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए ठगों के खातों के ट्रांजेक्शन पर रोक लगाई और पीड़ितों के खातों में लौटा दी।
ऐसे ठगी का शिकार हुए लोग
एग्रीकल्चर प्रोडक्ट का काम करने वाले अनिकेत ने गूगल पर इंडिया वलर्ड एक्सपोर्ट का नंबर ढूंढा था। ठग ने विदेशों में प्रोडक्ट बेचने का झांसा देकर 33 हजार 760 रुपये आनलाइन जमा करवा लिए।
शिकायतकर्ता दीया ने डाटा एंट्री के जॉब के लिए गूगल पर नंबर तलाशा। जिस व्यक्ति से संपर्क हुआ वो ठग निकला और रजिस्ट्रेशन, प्रोसेस के नाम पर सात हजार रुपये जमा करवा लिए।
शिकायतकर्ता सोना ने ई-कामर्स कंपनी फ्लिपकार्ट के कस्टमर केयर के नंबर निकाले थे। ठग ने अधिकारी बनकर बात की और ई-वालेट के माध्यम से 20 हजार रुपये निकाल लिए।
फरियादी अबू ने आनलाइन ट्रांजेक्शन में दिक्कत आने पर यूनियन बैंक के कस्टमर केयर के नंबर निकाले थे। ठग ने कस्टमर केयर अधिकारी बनकर बात की और एनी डेस्क एप डाउनलोड करवाकर खाते से एक लाख 25 हजार रुपये निकाल लिए।
अनजान व्यक्तियों से सावधान रहे उपभोक्ता
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) राजेश हिंगणकर ने बताया कि ठगी की ज्यादातर घटनाएं गूगल के माध्यम से हुई हैं। उपभोक्ताओं को अनजान लोगों से सावधान रहने की आवश्यकता है। ठगी की घटना होने पर तत्काल साइबर सेल की हेल्पलाइन 7049124445 पर शिकायत करें।
