प्राइवेट स्कूल ने रोकी टीसी, सरकारी स्कूल में बच्चियों को नहीं मिल रहा प्रवेश

By Abhishek Raghuvanshi
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कलेक्टर ने तुरंत शिक्षा अधिकारी को सरकारी स्कूल में प्रवेश दिलाने भेजा, जनसुनवाई में कई लोगों ने कलेक्टर को सुनाई पीड़ा।

प्रशासनिक संकुल में आयोजित होने वाली जनसुनवाई में मंगलवार को बांणगंगा में रहने वाली रिंकी गिलवाल पहुंची। उन्होंने कहा कि कोविड के बाद से हमारी आमदानी आधे से भी कम रह गई है। इसलिए दोनों बच्चियों को प्राइवेट स्कूल में नहीं पढ़ा सकते। बच्चियों को कर्मा नगर स्थित शांति विद्या निकेतन स्कूल से निकालकर सरकारी स्कूल में प्रवेश दिलाना चाहते हैं, लेकिन बाणगंगा के सरकारी स्कूल में बच्चियों को प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। प्राइवेट स्कूल वाले फीस जमा नहीं करने पर टीसी नहीं दे रहे। सरकारी स्कूल वाले भी भगा देते हैं। कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंग शिक्षा अधिकारी और डीपीसी को महिला के साथ स्कूल में जाकर प्रवेश दिलाने के निर्देश दिए। साथ ही शाम को रिपोर्ट भी बुलाई है।

इंदौर के कंडिलपुरा क्षेत्र में रहने वाली दिव्यांग महिला राधाबाई को रोजगार
और उसके परिवार के भरण-पोषण के लिए कलेक्टर डा. इलैया राजा टी ने जनसुनवाई में रेट्रोफिटिंग स्कूटी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। यह वाहन मिलने से राधाबाई अब अपना छोटा व्यवसाय प्रारंभ कर परिवार का बेहतर रूप से भरण-पोषण करेगी। इसी तरह जनसुनवाई में पहुंचे अन्य आवेदकों को भी कलेक्टर ने उनकी जरूरत के मुताबिक मदद उपलब्ध कराई।

बेसहारा विधवा महिला को दी सहायता
इसके अलावा दीपिका चौहान को, जो एक बेसहारा विधवा महिला है, उसे पांच हजार रुपये की तत्कालिक आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई। साथ ही इसे विधवा पेंशन स्वीकृत करने और बीपीएल राशन कार्ड बनाने के निर्देश भी दिए गए। जनसुनवाई में पहुंची बरखा सोनी ने कहा कि पति से तलाक के बाद से ही 15 साल के मानसिक विकलांग बेटे का भरण पोषण कर रही हूं। माता-पिता भी गरीब हैं, इसलिए उन पर भी बोझ नहीं बन सकती। महिला ने प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आवेदन दिया। बरखा का कहना है कि प्राइवेट नोकरी कर खुद और बच्चे का जीवन यापन कर रही हूं।

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ड्रेनेज की समस्या नहीं हुई दूर
साईं नेचर कालोनी राऊ में रहने वाले रहवासी बदबू और गंदगी से परेशान हैं। कई बार शिकायत के बाद भी कालोनी की ड्रेनेज लाइन को ठीक नहीं किया जा रहा। परेशान रहवासी कालोनाइजर से कई बार शिकायत कर चुके हैं। इसके बाद भी समस्या का समाधान नहीं किया गया। मामले में एडीएम ने जांच कराने की बात कही

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