पुलिस आयुक्त मकरंद देऊस्कर की सुनवाई से जनता ही नहीं बल्कि अफसर भी कायल हैं। आयुक्त हरेक से मिलते हैं, सुनते हैं और तुरंत हल भी निकालते हैं। रानी सराय पुलिस कंट्रोल रूम पर अतिरिक्त पुलिस आयुक्त कार्यालय में सुबह से भीड़ लग जाती थी। ज्यादातर शिकायतकर्ता ऐसे होते थे जो दूसरी-तीसरी बार आवेदन लेकर आए थे। आयुक्त की सुनवाई ने लोगों में भरोसा जगाया है। जनसुनवाई में आई शिकायतों को वे कायदे से सुनते हैं। थाना प्रभारी से लेकर डीसीपी को काल लगा देते हैं। इसके बाद कार्यालय आने वाले आवेदकों को भी एक एक कर सुनते हैं। आयुक्त शिकायतों का रिकार्ड भी रखते हैं। आवेदकों को टालने वाले थाना प्रभारियों से न सिर्फ स्पष्टीकरण मांगते हैं बल्कि संबंधित एसीपी, एडीसीपी से उनकी भूमिका के बारे में पूछने में देरी नहीं करते। आयुक्त के इस तरीके के कई अफसर भी कायल हैं।
