गेहूं के दाम को लेकर इंदौर की लक्ष्मीबाई मंडी में किसानों का फिर हंगामा

By Abhishek Raghuvanshi
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गेहूं के दामों को लेकर इंदौर की लक्ष्मीबाई अनाज मंडी में मंगलवार दोपहर एक बार फिर हंगामा हो गया। आधे दिन का व्यापार होने के बाद कुछ किसानों ने उपज के कम दाम मिलने की शिकायत की। किसान और किसान नेताओं ने मांग रखी कि मंडी में भी गेहूं की नीलामी समर्थन मूल्य से नीचे पर नहीं होना चाहिए। दोपहर होते-होते कुछ किसान मंडी के गेट के बाहर धरने पर बैठ गए और एमआर-5 पर जाम लगा दिया।\

किसान मांग कर रहे थे कि मंडी में गेहूं न्यूनतम समर्थन मूल्य 2115 रुपये से कम में नहीं खरीदा जाए। व्यापारी इसी दाम से बोली शुरू करें। किसानों के समर्थन में कांग्रेस नेता भी पहुंच गए। मंडी सचिव व अन्य अधिकारी भी आ गए। चर्चा के लिए मंडी के व्यापारी प्रतिनिधियों को भी बुलाया। किसानों और व्यापारी प्रतिनिधियों के साथ मंडी अधिकारी विवाद का हल निकालने में जुटे रहे।

व्यापारियों का कहना- अनुचित दबाव बना रहे
व्यापारियों ने कहा कि हम पर अनुचित दबाव बनाया जा रहा है। हल्की क्वालिटी के पानी लगा गेहूं जो खुद सरकार भी समर्थन मूल्य पर हो रही सरकारी खरीदी में लेने से इनकार कर रही है, उसे व्यापारियों को ऊंचे दाम पर लेने के लिए कैसे कहा जा सकता है। व्यापारी तो गेहूं 2000 रुपये से लेकर 2900 रुपये प्रति क्विंटल में भी खरीद रहे हैं। अच्छी गुणवत्ता वाला गेहूं जो आगे अच्छे दाम पर बिकेगा, उसकी कीमत ज्यादा दी जा रही है। ऐसा है तो प्रशासन को कह देना चाहिए कि अच्छी क्वालिटी के गेहूं भी 2115 रुपये पर किसान बेच दे।

गेहूं से निर्यात प्रतिबंध हटाएं
व्यापारियों ने कहा कि सरकार ने खुद एफएक्यू क्वालिटी का पैमाना अपने लिए तय कर दिया है। गेहूं की कीमतें ऊपर ले जानी हैं तो निर्यात प्रतिबंध हटा देना चाहिए। निर्यात होगा तो हर तरह का गेहूं 2300 रुपये से ऊपर बिकेगा। एक घंटे चली चर्चा के बाद मंडी में व्यापार फिर शुरू हो सका।

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एफएक्यू खरीदेंगे
व्यापारियों ने सहमति दी है कि एफएक्यू गुणवत्ता वाला गेहूं समर्थन मूल्य से ज्यादा में ही खरीदा जाएगा। जिस किसान को गेहूं के दाम उचित नहीं लगते हैं, उसे नीलामी के बाद भी अपनी उपज वापस ले जाने की छूट रहेगी।

नरेश परमार, मंडी सचिव
2900 तक खरीद रहे हैं
अच्छी क्वालिटी का गेहूं मंगलवार को भी 2900 रुपये के दाम पर खरीदा। खराब गेहूं जो खुद सरकार नहीं खरीद रही, उसे व्यापारियों को ऊंची कीमत देकर खरीदने का दबाव नहीं बनाया जा सकता। किसान पर उपज बेचने की जबरदस्ती नहीं है। बेहतर है सरकार को हर तरह का गेहूं समर्थन मूल्य पर खरीदना चाहिए।

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