कोतवाली थाने से क्यों घबराते हैं टीआइ

By Abhishek Raghuvanshi
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थाना प्रभारी के लिए जद्दोजहद करने वाले निरीक्षक कोतवाली थाने का प्रस्ताव सुनते ही पीछे हट जाते हैं। इस थाने का रिकार्ड सही नहीं है। पिछले दो सालों से थाना प्रभारियों को किसी न किसी गड़बड़ी में बदनामी हाथ लगी है। शुरुआत वरिष्ठ निरीक्षक भास्कर दत्त त्रिपाठी से हुई है। पदोन्नति के ठीक पहले त्रिपाठी खड़ी कराई कांड में फंस गए और उन्हें थाने से हटना पड़ा। उनके बाद में 2007 बैच के अशोक पाटीदार ने कमान संभाली लेकिन वे भी मिलावट कांड में फंस गए। मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचा और पाटीदार के साथ सीएसपी हरीश मोटवानी भी भोपाल अटैच हो गए। कुछ दिन आइपीएस सोनाक्षी सक्सेना रहीं और सुनील शेजवार की पोस्टिंग की गई। क्राइम ब्रांच से कोतवाली आए शेजवार भी खड़ी कराई केस में उलझ गए और पुलिस आयुक्त ने चार महीने में लाइन रवाना कर दिया। चौथे टीआइ मनोज मेहरा थे जिन्हें अवैध वसूली कांड में नापा गया।

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