किसान क्रेडिट कार्ड से ऋण लेकर अपनी फसल बोने वाले कई किसान मंगलवार दोपहर कलेक्टर कार्यालय अपनी गुहार लेकर पहुंचे। दरअसल किसानों ने फसल के लिए कर्नाटक बैंक से ऋण लिया था जो कि लगभग 4 साल के बाद भी चुकता नहीं हो पाया।किसानों का कहना है कि एक तो फसल खराब होने के कारण उन्हें मुआवजा राशि सही तरह से नहीं मिल पा रही है और उस पर से बैंक का भी दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले 2 साल कोरोनकाल के कारण किसान अपनी फसल नहीं बो पाया है और अधिक ओलावृष्टि के कारण फसल खराब होने से बाजार में भी फसल का सही दाम उनके हाथ नहीं लगा है। ऐसे में किसानों को आर्थिक नुकसान तो हो ही रहा है साथ ही बैंक द्वारा लगातार तगादा करने से वह मानसिक रूप से भी परेशान हो रहे हैं। अब तो स्थिति यह है कि कर्नाटक बैंक ने उनकी जमीनों की कुर्की के आदेश जारी कर दिए हैं। आगामी 25 तारीख को ग्राम कालूखेड़ी, खेड़ाचितलावदिया,झित्तरखेड़ी और रलायती के लगभग 25 से अधिक किसानों को बैंक द्वारा कुर्की के आदेश आ गए हैं। किसानों में इस बात का भी आक्रोश है कि महज़ 3 से 9 लाख की बीमा राशि की कुर्की के लिए उनके करोड़ों रुपए के खेत नीलाम किए जा रहे हैं। एक तरफ किसानों ने तहसीलदार और क्षेत्र के ही भू माफियाओं की सांठगांठ की और भी इशारा किया है।इस पूरे मामले में बैंक के एवजी की भी मुख्य भूमिका सामने आ रही है। किसानों की मांग है कि उन्हें कुछ समय दिया जाए और क्रेडिट कार्ड से ली गई राशि के भुगतान के लिए किस्तों में पैसा जमा करने की अनुमति दी जाए। पूरे क्षेत्र में लगभग 400 किसान है जो ऋण न चुकाने की स्थिति में अपनी जमीन नीलाम होने की समस्या से जूझ रहे हैं। हालांकि इस पूरे मामले में अभी बैंक के अधिकारियों और प्रशासन के किसी भी अधिकारी की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आ सकी है।
