इन्दौर कमिश्नर ने दी अनूठी सजा – राहगीर से विवाद करने वाले आरोपियों के 2 व 4 पहिया वाहन चलाने और उन पर बैठने पर प्रतिबंध लगाया है।

By Abhishek Raghuvanshi
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  • आरोपितों के विरुद्ध मारपीट, तोड़फोड़ और अड़ीबाजी का केस दर्ज हुआ था।

इंदौर। शहर में दो अलग-अलग मामलों में पुलिस कमिश्नर मकरंद देऊस्कर ने अनोखी सजा सुनाई। एक मामले में आरोपितों के वाहन चलाने पर तो रोक लगाई ही, किसी अन्य के वाहन पर भी बैठने की अनुमति नहीं दी। वहीं सड़क पर उत्पात मचाने वाले युवकों को वृद्धाश्रम में सेवा करने का निर्देश दिया।पहले मामले में राहगीर से विवाद करने वाले दो आरोपितों को पुलिस कमिश्नर देऊस्कर ने सजा सुनाई है। आरोपित शहनवाज अंसार शाह और सलमान शाकिर पर दो व चार पहिया वाहन चलाने और उन पर बैठने पर प्रतिबंध लगाया है। आदेश में यह भी लिखा कि आरोपितों ने आदेशों की अवलेहना की या किसी ने मदद की तो उसके विरुद्ध भी रासुका के तहत कार्रवाई होगी। उन्होंने टीआइ को मुनादी से जनता को अवगत करवाने के लिए कहा है।

विजय नगर थाने की पुलिस ने छह सितंबर को अर्चित मेहता की शिकायत पर शहनवाज व सलमान के विरुद्ध केस दर्ज किया था। अर्चित पत्नी के साथ अनुराग नगर जा रहे थे। बाइक सवार दोनों आरोपितों ने अर्चित की कार को टक्कर मारी और पत्थर मारकर कांच फोड़ डाले। मंगलवार को पुलिस आयुक्त मकरंद देऊस्कर ने मप्र राज्य सुरक्षा अधिनियम 1990 की धारा 3(1)(क)(ग) के तहत आदेश जारी करते हुए कहा कि दोनों आरोपित छह माह की कालावधि के लिए स्वयं अथवा किसी अन्य का दोपहिया और चार पहिया वाहन का उपयोग नहीं कर सकेंगे। निर्बन्धन अवधि में अनावेदक स्वयं अथवा किसी अन्य के दो और चार पहिया वाहन पर न आगे और न ही पीछे बैठेंगे। अनावेदकों की मदद करने वालों को भी राज्य सुरक्षा कानून अधिनियम 1990 की धारा 14 के तहत कार्रवाई करने के आदेश दिए है।

जीवनयापन और आपातकाल स्थिति में लोक परिवहन
आदेश के मुताबिक अनावेदक को जीवनयापन के लिए काम पर आने-जाने व आपातकालीन स्थिति में आवागमन करने के लिए लोक परिवहन का उपयोग करने के आदेश दिए गए हैं। एंबुलेंस का उपयोग करने की भी छूट प्रदान की गई है। बढ़ावा देने के लिए लोक परिवहन का उपयोग के आदेश दिए हैं।

डीसीपी ने भेजा रासुका का प्रस्ताव
आरोपितों के विरुद्ध मारपीट, तोड़फोड़ और अड़ीबाजी का केस दर्ज हुआ था। जोन-2 के डीसीपी द्वारा रासुका के तहत सीपी कोर्ट में प्रकरण प्रस्तुत किया गया था। डीसीपी ने कहा कि आरोपितों का आतंक है। इनके विरुद्ध कोई रिपोर्ट भी नहीं लिखवाता है। सांप्रदायिक विवाद भी हो सकता है। कोर्ट ने सुनवाई की तो अनावेदक पक्ष ने बचाव के लिए साक्षी नसरुद्दीन को बुलाया। नसरुद्दीन ने पुलिस के सभी आरोपों का खंडन किया। कोर्ट ने दोनों पक्षों की सुनवाई की और आरोपितों को सजा सुना दी।

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