शासन को बताना है कितने चौराहों पर पुलिसकर्मी तैनात किए और यातायात सिग्नल 24 घंटे चालू रहते हैं या नहीं। एआइसीटीएसएल और आयडीए को भी बनाया पक्षकार।
शहर की बदहाल यातायात व्यवस्था को लेकर हाई कोर्ट में चल रही जनहित याचिका में बुधवार को सुनवाई होना है। सरकार को कोर्ट को बताना है कि 14 अक्टूबर 2019 को दिए आदेश का कितना पालन हो रहा है। कितने चौराहों पर कितने पुलिसकर्मी तैनात हैं और क्या शहर में चौराहों पर लगे यातायात सिग्नल 24 घंटे चालू रहते हैं।
कोर्ट के आदेश के बाद पिछली सुनवाई पर अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विस लिमिटेड (एआइसीटीएल) और इंदौर विकास प्राधिकरण (आइडीए) को भी पक्षकार बनाया गया है। उम्मीद है कि बुधवार की सुनवाई में इन दोनों नए पक्षकारों की तरफ से भी वकील उपस्थित हो जाएंगे।
हाई कोर्ट में यह जनहित याचिका राजलक्ष्मी फाउंडेशन ने दायर की है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अभिभाषक अजय बागडिया पैरवी कर रहे हैं। याचिका में कहा है कि शहर में यातायात की स्थिति बहुत खराब है। रात के वक्त शहर के एक भी चौराहे पर यातायात सिग्नल चालू नहीं रहते। सभी चौराहों पर लगे सिग्नल बंद कर दिए जाते हैं।
दुर्घटना संभावित क्षेत्र तो चिह्नित कर लिए गए लेकिन इन चिह्नित स्थानों पर दुर्घटना रोकने के कोई इंतजाम नहीं किए गए। शाम के समय तो शहर में यातायात की स्थिति अत्यंत खराब हो जाती है। याचिका की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने 14 अक्टूबर 2019 को आदेश दिया था कि सभी यातायात सिग्नल 24 घंटे चालू रखे जाएं और सुबह 8 से 12 और शाम 5 से रात 11 बजे तक शहर के सभी प्रमुख चौराहों पर कम से कम दो-दो पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाए।
कोर्ट ने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से कहा था कि वे शपथ पत्र पर बताएं कि 14 अक्टूबर को दिए आदेश का कितना पालन हुआ है और अगर पालन हो रहा है तो कितना।
