इंदौर के विकास में रही नए मुख्यमंत्री मोहन यादव की अहम भूमिका, ऐसे दिया योगदान

By Abhishek Raghuvanshi
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  • शहर के विकास के लिए देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से जमीन दिलवाई। विश्वविद्यालय को भी मेडिकल कालेज से 15 एकड़ जमीन दिलाने में किया हस्तक्षेप।

इंदौर। शहर के विकास को लेकर जिला प्रशासन ने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से 34 हजार वर्गमीटर जमीन मांगी, जिसमें भंवरकुआं थाना, मंदिर और पानी की टंकी को शिफ्ट किया जाना था, मगर विश्वविद्यालय प्रशासन ने जमीन देने से इन्कार कर दिया। मामला प्रदेश स्तर तक पहुंचा। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विश्वविद्यालय और जिला प्रशासन के बीच समन्वयक की जिम्मेदारी तत्कालीन उच्च शिक्षा मंत्री व वर्तमान मुख्यमंत्री मोहन यादव को सौंपी।

तुरंत विकास के लिए हस्तक्षेप करते हुए बैठक बुलाई। यादव के साथ ही सांसद शंकर लालवानी, तत्कालीन कलेक्टर मनीष सिंह, तत्कालीन निगमायुक्त प्रतिभा पाल ने कुलपति डा. रेणु जैन से बैठक की। तीन घंटे में शहर के विकास के लिए रास्ता निकाला। साथ ही विश्वविद्यालय को भी मेडिकल कालेज से 50 में से 15 एकड़ जमीन दिलवाई। यह जमीन छोटा बांगड़दा में जिला प्रशासन की तरफ से मिली। इन दिनों कालेज की जमीन को लेकर कागजी प्रक्रिया चल रही है।

एनईपी सबसे पहले की लागू
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) को मध्य प्रदेश में सबसे पहले लागू किया गया। उस दौरान यादव ही उच्च शिक्षा मंत्री थे। स्नातक पाठ्यक्रम को एनईपी के दायरे में लिया गया। इसके बाद पाठ्यक्रम चार वर्षीय कर दिए हैं। सभी विश्वविद्यालय ने इसे गंभीरता से लेते हुए नया पाठ्यक्रम तैयार किया, जिसमें विद्यार्थियों को अपने पसंदीदा विषय चुनकर पढ़ाई करने की स्वतंत्रता मिली।

विवि को शासकीय दर्जा
प्रदेश स्तरीय विश्वविद्यालयों को शासकीय का दर्जा भी दिलवाया। उच्च शिक्षा मंत्री रहते हुए यादव ने विश्वविद्यालय के नाम के आगे शासकीय लिखने के निर्देश दिए। शुरुआत में कई विश्वविद्यालयों ने इसका विरोध भी किया। मगर डेढ़ साल से सरकारी दस्तावेजों में इस तरह विश्वविद्यालयों का उल्लेख किया जाने लगा।

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उच्च शिक्षा को प्राथमिकता मोहन यादव अब प्रदेश के नए मुख्यमंत्री हैं
, जो उच्च शिक्षा को प्राथमिकता देंगे। वे मंत्री रहने के दौरान भी कई प्रयोग करने में लगे रहते थे। एनईपी भी प्रभावी ढंग से उन्होंने लागू की है। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय को हरसंभव मदद की है। लंबे समय से नियुक्तियां बंद थीं, लेकिन उन्होंने दो साल पहले प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए। विश्वविद्यालयों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्ववित्त पाठ्यक्रम संचालित करने पर जोर दिया है। कई विश्वविद्यालयों में स्ववित्त पाठ्यक्रम की संख्या बीते कुछ सालों में बढ़ी है। -डा. रेणु जैन, कुलपति, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय

प्रशासनिक कार्यों की समझ
विश्वविद्यालय से जुड़े प्रशासनिक कार्यों की उन्हें अच्छी समझ है। विश्वविद्यालय को आगे बढ़ाने के लिए नए निर्माण कार्यों की स्वीकृति देना। साथ ही परीक्षा-रिजल्ट को आनलाइन करने पर जोर दिया। इसके लिए आइटी कंपनी से साफ्टवेयर बनवाया जा रहा है, जो इन दिनों विश्वविद्यालय से उनकी आवश्यकताओं पर चर्चा करने में लगी है। विश्वविद्यालयों का अनुदान बढ़ाने के लिए भी प्रयास किया। – अजय वर्मा, कुलसचिव, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय

कर्मचारियों के लिए लेते थे त्वरित निर्णय
विश्वविद्यालय के कर्मचारियों को लेकर तत्कालीन उच्च शिक्षा मंत्री यादव ने कई अहम कदम उठाए है। चतुर्थ श्रेणी स्थायी कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए त्वरित निर्णय लिया। उसकी बदौलत ही कर्मचारियों की नौकरियां सुरक्षित हुई। यहां तक कि पेंशन पाने वाले कर्मचारियों का महंगाई भत्ता भी बढ़ाया। साथ ही सातवें वेतनमान से पेंशन के लिए भी फाइल आगे बढ़ाई थी। इस पर निर्णय होना बाकी है। -चैनसिंह यादव, अध्यक्ष, देवी अहिल्या गैर शिक्षक संघ

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