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मध्य प्रदेश विधानसभा के इतिहास में विधायकों को निलंबित करने का मामला पहली बार नहीं है। इसके पहले भी मार्च 1966 में विधानसभा उपाध्यक्ष नर्मदा प्रसाद श्रीवास्तव, मार्च 1991 में अध्यक्ष बृजमोहन मिश्रा और फरवरी 2003 में अध्यक्ष ईश्वर दास रोहाणी द्वारा विधायकों को निलंबित किया गया था।
उल्लेखनीय है कि विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान गुरुवार को जमकर हंगामा हुआ। कांग्रेस विधायक व पार्टी के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा कार्यकर्ताओं को सरकार के खर्च पर खाना खिलाने का मुद्दा उठाया। साथ ही गुजरात के जू में बाघ, घड़ियाल आदि भेजने और बदले में चिड़िया, भेड़ व बकरी खरीदने की बात कही।
इस मामले पर सदन में इतना हंगामा हुआ कि तीन बार सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। इसके बाद संसदीय कार्यमंत्री डा.नरोत्तम मिश्रा ने जीतू पटवारी को निलंबित करने का प्रस्ताव रखा। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम ने उन्हें खेद जताने के लिए कहा, जिसे उन्होंने अस्वीकार कर दिया और फिर पटवारी को बजट सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया।
सदन में ये तीन प्रकरण रहे विशेष
17 मार्च 1966 – विधानसभा में हरिभाऊ जोशी, पंढरीराव कुदत, देवी सिंह पटेल, रामस्वरूप वर्मा और रामप्रकाश मल्होत्रा ने अध्यक्षीय पीठ के अधिकार की उपेक्षा की और हठपूर्वक, जानबूझकर कार्य में बाधा डालकर सभा के नियमों का दुरुपयोग किया। इस दौरान पंढरीराव कुदत ने सीट छोड़कर चिल्लाते हुए विधानसभा उपाध्यक्ष को मारने के लिए अपने पैर से एक चप्पल निकालकर उनकी और फेंका था। इन पांचों विधायकों को एक सत्र के लिए सभा की सेवा से निलंबित कर दिया गया था।
20 मार्च 1991 – विधायक उमाशंकर मुंजारे, धीरेन्द्र सिंह धीरू और जयकरण साकेत आसंदी के समीप आ गए थे। अध्यक्ष ने तीनों को बैठने को कहा, नहीं माने तो मार्शल को आदेश दिया कि तीनों को सदन से बाहर निकाल दें। इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री बाबूलाल गौर ने तीनों विधायकों को सात दिन के लिए निलंबित करने का प्रस्ताव रखा था। अध्यक्ष ने तीनों को निलंबित कर सदन से बाहर निकलवाया था।
17 फरवरी 2003 – डा. सुनीलम विधानसभा सदन की कार्यवाही से एक सप्ताह के लिए निलंबित किए गए थे। उन्होंने दलित महिला सरपंच द्वारा आत्मदाह की कोशिश का मामला उठाया था। अध्यक्ष के बार-बार सीट पर बैठने का कहने के बाद भी सुनीलम सीट से उठकर अपनी बात रख रहे थे। सदन की कार्यवाही में व्यवधान का हवाला देकर डा. सुनीलम को अध्यक्ष ने एक सप्ताह के लिए निलंबित कर दिया था। इसके बाद उन्हें उठाकर सदन के बाहर ले जाया गया था।
