सुनियोजित ढ़ंग से सुचारू है अवैध पाड़ा कटिंग और अवैध पाड़ा मांस विक्रय की दुकानें- सूत्रों के अनुसार शनिवार रात निश्चित ही कटें दर्जनों पाड़े। पुलिस रविवार को करें कार्यवाही तो मिलेगी बड़ी सफलता।

By Abhishek Raghuvanshi
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अवैध कार्यों पर अंकुश लगाने के लिये ही खाकी को शासन का वरदान मिला है इसलिये उसे उसके क्षेत्र में होने वाले प्रत्येक अवैध कार्यों को परख कर सम्बधित विभाग के साथ या स्वयं भी जा कर उसकी अवैधता को भंग करने की कार्यवाही की जाना चाहिये। लेकिन बीते दिनों हुये एक प्रकरण में पुलिस की तरफ से किसी प्रकार का कोई प्रकरण दर्ज नहीं किया गया जबकि सारा शहर जानता है उन स्थानों पर अवैध रूप से भैस, पाड़े की कटाई और उसका मांस भी अवैध रूप से बेचा जाता है। 

बताने वाले कहते है पुलिस के कदम पड़े उसके पहले ही खबरी ने खबरदार कर दिया था और उसके बाद जब पुलिस इस अवैध बूचड़खाने से चली गयी तब कुछ समय के बाद फिर से मांस बिक्री का अवैध कारोबार शुरू हो गया था। 

पुलिस की शक्ति कोई सख्त कदम उठा नहीं पायी। समस्त जानकारी देने के बाद भी आंखों पर माया की पट्टी बांध कर चलती पुलिस अवैध पाड़ा मांस की दुकान को देख भी नहीं पाई।

अभी भी कार्यवाही के नाम पर पुलिस लल्लूराम की तरह मुंह लटकाए हुये लाचार सी लगी हुई है। लेकिन पुलिस चाहे तो रविवार को कार्यवाही कर सकती है जिसमें पुलिस को बहुत बड़ी सफलता प्राप्त होगी। पुलिस को अवैध कार्य के साथ ही अवैध कार्य का स्थल और अवैध कार्य का समय भी पता है उस पर भी यदि पुलिस ढील पौल करती है तो जनता को अपनी जागरुकता को और ज्यादा बढ़ाने की जरुरत है। 

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शनिवार को झाबुआ के अवैध व्यापारियों ने रानापुर बाजार से बहुत से पाड़े और भैस को खरीदा जिसे किसी ग्रामीण स्थल पर छुपाया और रात के अन्धेरे में झाबुआ लाया गया। उसके बाद उन बेजुबान जानवरों की कटाई की गयी। 

एक जानकारी के अनुसार जिस दिन पुलिस ने  महीन सी कार्यवाही की थी उसी दिन कसाइयों ने किसी से विवाद करते हुये कहा था की कोई कुछ भी करले ये काम बन्द कभी नहीं होगा। 

इसी के साथ उसी दिन दो कसाइयों के बीच अवैध पाड़ा मांस को बेचने को लेकर विवाद गर्माया था जिसमें एक ग्रामीण नौकर के साथ मारपिट की गयी थी जिसमें 35 से 40 ग्रामीणों से आ कर हंगामा किया और 35 हजार में समझौता किया था। 

इसी घटना को देखते हुये वही के निवासियों को कुछ वर्ष पहले की घटना की याद दिलवा दी। उस दौर में किसी कारण विवाद गर्माया था और सेकड़ों ग्रामीणों ने मोहल्ले में घुस कर हर किसी पुरुष को मारा था जिसमें गलती सिर्फ और सिर्फ अवैध पाड़ा मांस का व्यापार करने वालों की ही थी। लेकिन उसका खामियाजा पूरे मोहल्ले के पुरुषो को भुगतना पड़ा था। 

इसी के साथ कुछ महिनों पहले की घटना का जिक्र भी जुबां पर आया और जिसकी दास्ताँ भी भयानक थी। 

कुछ महिने पहले राजस्थान का एक व्यक्ति झाबुआ में अपने किसी रिश्तेदार के घर आया था और वह शराब के सेवन के लिये नगर पालिका के पीछे स्थित शराब दुकान पर आया। 

शराब दुकान के पीछे भी पहले प्रतिदिन पाड़े की कटिंग की जाती थी। अचानक एक पाड़ा सुध खो बैठा और पागलपन की अवस्था में भागा। अवैध पाड़ा कटिंग करने वालों के हाथों से छुट कर वो आगे की तरफ भागा जहां शराब दुकान से शराब लेकर वह राजस्थान का व्यक्ति खड़ा था तभी पाड़े ने उसे जोरदार टक्कर मारी। टक्कर इतनी खतरनाक थी कि, व्यक्ति के अंडकोष तक बाहर आ गये थे पुलिस ने वहां भी अपने खेल को खेल लिया। 

व्यक्ति का उपचार दाहोद में करवाया गया। उसके परिजनो को भरपूर पैसा दिया गया। पूरा इलाज करवा कर उसे उसके गृह ग्राम में भेजा गया। 

समचार पत्रों में जब खबर लगी थी तब तक पुलिस ने प्रकरण दर्ज नहीं किया था और उसके बाद भी कोई प्रकरण दर्ज नहीं किया क्युंकि अवैध पाड़ा काटने वालों का मुखिया पुलिस थाने में थाना प्रभारी से मिलने पहुंच गया था। 

हालांकि इतिहास को घटनाओं को ध्यान में रख कर वर्तमान में हुई घटना के कारण लोगों में भय का माहौल है। 

बहरहाल मौके पर मारकर हथौड़ा वस्तु का आकर बदल सकता है। शनिवार को ही रविवार की तैयारी की जाती है। जिसके लिये रानापुर के हाट बाजार से पाड़ो को खरीदकर लाया जाता है और झाबुआ में ही काटा जाता है। पुलिस चाहे तो इस अवैध कार्य को आज रंगे हाथ पकड़ सकती है।

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