/राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग का कार्यक्रम बना जनता का मेला…जी हां कुछ इसी तरह का नजारा मानस भवन में देखने को मिला!राष्ट्रीय बाल आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो की बेंच का आयोजन किया गया था! लेकिन स्थानीय प्रशासन द्वारा क्षेत्र में सही तरीके से प्रचार प्रसार ना करने के कारण जनता को सही जानकारी नहीं मिली जिस कारण से बच्चों के मामलों से अधिक अन्य मामले देखने को मिले..? इस कार्यक्रम में महिला बाल विकास विभाग द्वारा जो मध्यान भोजन रखा गया था अगर उस क्वालिटी का मध्यान भोजन बच्चों को मिलने लगे तो शायद कुपोषण की स्थिति ही ना बने…कार्यक्रम में स्टाल लगाकर मध्यान भोजन के मेन्यू रखा गया था उसे अधिकारी ही खाते नजर आए। कार्यक्रम में बच्चों के अधिकार से संबंधित मामले कम और अन्य समस्याओं के मामले अधिक नजर आए….कुल मिलाकर बाल अधिकार आयोग का यह कार्यक्रम पूरी तरह से फेल नजर आया….?
