माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, रीवा परिसर के वर्चुअल लोकार्पण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री जी के भाषण बिंदु

By Abhishek Raghuvanshi
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विंध्य क्षेत्र के विकास में हमने कोई कसर नहीं छोड़ी है, चाहे विंध्य में सड़कों का जाल हो, नहरों का निर्माण हो, सिंचाई की व्यवस्था हो, सोलर प्लांट लगाना हो, निवेश के लिए प्रयास करना हो।

राजेन्द्र जी की पहल के कारण ही पत्रकारिता के रीवा परिसर की परिकल्पना की गई और आज वो साकर हो रही है।

मुझे तोड़ लेना वनमाली! उस पथ पर देना तुम फेंक, मातृभूमि पर शीश चढ़ाने जिस पथ जावें वीर अनेक..

ये कविता दादा माखनलाल चतुर्वेदी जी ने लिखी थी। ऐसी अनेक कविताएँ उन्होंने लिखीं थी। वो पत्रकार भी थे।

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आज मुझे कहते हुए गर्व है कि माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय की ख्याति देश में ही नहीं पूरे विश्व में है।

यहाँ आज के दौर के बड़े-बड़े पत्रकारों का अध्ययन हुआ है।

कई वर्षों से विंध्य क्षेत्र में आधुनिक और सुसज्जित मीडिया शिक्षण केंद्र की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।

युवाओं और विद्यार्थियों की मांग को देखते हुए हमने साल 2016 में रीवा में ये परिसर प्रारम्भ किया था।

मुझे बताते हुए प्रसन्नता है कि इस परिसर में मध्यप्रदेश के अलावा उत्तरप्रदेश, बिहार, राजस्थान और उत्तर पूर्वी राज्यों के विद्यार्थी आकर पढ़ाई कर रहे हैं।

मीडिया के प्रति रुचि और रुझान को देखते हुए इस परिसर की स्थापना की गई है।

मुझे कहते हुए खुशी है कि इस परिसर में अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त मीडिया स्टूडियो, कम्युनिटी रेडियो, कंप्यूटर लैब स्थापित किए गए हैं।

विद्यार्थियों को सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया या कम्युनिटी रेडियो हो, इसका व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है।

हमारे रीवा परिसर के विद्यार्थी राष्ट्रीय स्तरों के चैनलों और समाचार पत्रों में कार्य कर रहे हैं।

मैं माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के इस सुंदर भवन का लोकार्पण करते हुए प्रसन्न हूँ।

मुझे पूरा विश्वास है कि माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय का रीवा परिसर देश में मीडिया और कंप्यूटर शिक्षण का महत्वपूर्ण एवं प्रतिष्ठित केंद्र बनेगा।

पत्रकार मित्रों! मैं जल्द ही भोपाल में स्टेट मीडिया सेंटर का भूमि पूजन करने वाला हूँ।
पिछले दिनों सीएम हाउस में मैंने पत्रकार मित्रों को निमंत्रित कर अनेक फैसलें किए थे।
लोकतंत्र का आधार स्तंभ मीडिया है।

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