LG और केजरीवाल के बीच नया विवाद, अब इस मुद्दे पर आमने-सामने

By Abhishek Raghuvanshi
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धार्मिक ढांचों को गिराने को लेकर दिल्ली के उपराज्यपाल और दिल्ली सरकार के बीच एक और खींचतान सामने आई है. दरअसल एलजी ने आरोप लगाया है कि एक तरफ दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया विकास परियोजनाओं के रास्ते में आ रहे धार्मिक ढांचों को गिराने की सिफारिश कर रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ वे इस तरह के विध्वंस का विरोध करते हुए जनता के बीच बिल्कुल अपनी विपरीत राय पेश कर रहे हैं.

दिल्ली एलजी ने अपनी फाइल नोटिंग में पूर्वोत्तर दिल्ली में दिल्ली-सहारनपुर हाईवे के रास्ते में आने वाले ऐसे 9 ढांचों को गिराने की मंजूरी देते हुए इस बात पर जोर दिया. एलजी ने कहा कि अगर दिल्ली सरकार पहले अनुमति दे देती तो अनावश्यक देरी से बचा जा सकता था.

सिसोदिया ने कही थी ये बात

इस मामले को लेकर दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने सोमवार को उपराज्यपाल से सुझाव दिया. सिसोदिया ने सुझान दिया कि धार्मिक स्थलों को ढहाने के बजाय उनके डिजाइन में बदलाव किया जाए. उन्होंने कहा कि दिल्ली में केंद्र सरकार के अलग-अलग आवासीय प्रोजेक्ट्स सहित अन्य डेवलपमेंट कार्यों के लिए लोगों की आस्था से जुड़े मंदिरों, मजारों व गुरुद्वारे को न तोड़ा जाए. इससे लाखों लोगों की आस्था को ठेस पहुंचेगी और शहर में लॉ एंड आर्डर की समस्या उत्पन्न हो जाएगी. दिल्ली पुलिस खुद अपनी रिपोर्ट में इसका जिक्र कर रही है.

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21वीं सदी में सब कुछ संभव’

राज्य के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने एलजी से अपील करते हुए कहा कि 21वीं सदी में मॉडर्न आर्किटेक्चर-इंजीनियरिंग में सब कुछ संभव है. हम जब पेड़ों को लेकर इतने संवेदनशील हैं कि घर या कोई स्ट्रक्चर बनाते हैं तो उसके डिजाइन में बदलाव कर पेड़ को बचाने का काम करते हैं. ठीक इसी तरह लाखों लोगों की धार्मिक भावनाओं से जुड़े इन मंदिरों, मजारों व गुरुद्वारों को बचाने के लिए इन प्रोजेक्ट्स के डिजाईन में भी बदलाव किया जाए. डेवलपमेंट होना चाहिए और हम सभी इसके पक्ष में है लेकिन यह भी ध्यान रखना चाहिए लोगों की आस्था आहत न हो.

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