याचिका में कहा गया, 6 जून, 2022 की जारी अधिसूचना संवैधानिक जनादेश के खिलाफ है. साथ ही ये ट्रांसजेंडरों के मौलिक अधिकारों का भी उल्लंघन है.
याचिकाकर्ता ने कहा है कि सरकार ने जाति आधारित गणना में जाति कोड सूची के तहत क्रम संख्या 22 पर हिजड़ा, किन्नर, कोठी, ट्रांसजेंडर (तीसरे लिंग) को एक अलग जाति कोड के रूप में वर्गीकृत किया. उन्हें लिंग की श्रेणी के अंतर्गत वर्गीकृत नहीं किया गया. ट्रांसजेंडरों का ऐसा वर्गीकरण ग़लत है और संवैधानिक आदेश के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के भी खिलाफ है.
